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'राज्य की प्रगति को जकड़ रही वित्तीय अनुशासनहीनता', शिवसेना यूबीटी ने 'सामना' में साधा सरकार पर निशाना

मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी के अनुसार कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र सहित देश के सभी 28 राज्य कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। यह एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य है।
 
'राज्य की प्रगति को जकड़ रही वित्तीय अनुशासनहीनता', शिवसेना यूबीटी ने 'सामना' में साधा सरकार पर निशाना

मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी के अनुसार कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र सहित देश के सभी 28 राज्य कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। यह एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य है।

शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा कि पिछले दस वर्षों में राज्यों का कुल कर्ज 31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार इसी तरह काम कर रही हैं, यानी भारी कर्ज लेकर शासन चला रही हैं। इसमें कहा गया है कि एक कहावत है “कर्ज लेकर त्योहार मनाना।”

संपादकीय में कहा गया कि केंद्र सरकार स्वयं भी लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हुई है। इसमें सवाल उठाया गया कि जब टैक्सदाताओं का पैसा केवल ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जाएगा तो विकास कार्यों का क्या होगा? यह बढ़ता कर्ज देश की अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जा रहा है?

संपादकीय में आगे कहा गया, “सीएजी ने भले ही सीधे तौर पर न कहा हो, लेकिन सच्चाई यह है कि वित्तीय अनुशासनहीनता और चुनाव जीतने के लिए लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च ने राज्य सरकारों को लगातार कर्ज के जाल में धकेल दिया है। इसके बावजूद सीएजी की रिपोर्ट ने राज्यों की वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर देश के सामने रखकर सराहनीय काम किया है।”

सीएजी की ‘फाइनेंस 2024-25’ रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों का कुल बजटीय खर्च 51.20 लाख करोड़ रुपये है, जबकि कुल कर्ज लगभग 100 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। संपादकीय में कहा गया कि घटती आय, बढ़ते खर्च, मुफ्त योजनाओं पर भारी व्यय, धीमी आर्थिक वृद्धि और पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने की मजबूरी के कारण अधिकांश राज्यों की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई है।

संपादकीय में यह भी कहा गया कि देश के लगभग सभी राज्य गंभीर राजकोषीय घाटे से जूझ रहे हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ सहित 15 राज्यों का राजस्व घाटा 3.46 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि लगातार बढ़ते कर्ज और ब्याज भुगतान के कारण राज्यों के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन नहीं बच रहा है। टैक्सदाताओं का पैसा केवल ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

--आईएएनएस

एसएके/एएस