केरल की पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम में भाजपा पार्षद पद से दिया इस्तीफा
तिरुवनंतपुरम, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल की पूर्व डीजीपी और पुलिस महानिदेशक का पद संभालने वाली राज्य की पहली महिला अधिकारी आर. श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के शास्तमंगलम वार्ड से भाजपा पार्षद पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से पार्टी के भीतर हलचल मच गई है।
दिसंबर 2025 में शास्तमंगलम वार्ड से आरामदायक बहुमत के साथ चुनाव जीतने वाली श्रीलेखा ने अपने वार्ड के लोगों को भेजे संदेश में इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने 30 सितंबर को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा नगर निगम के मेयर वी.वी. राजेश को सौंप दिया था। उन्होंने कहा कि इस्तीफे की एक प्रति तिरुवनंतपुरम के जिला कलेक्टर को भी दी जाएगी।
नगर निगम की डिप्टी मेयर आशा जी. नाथ ने कहा कि उन्हें श्रीलेखा के इस्तीफे की कोई जानकारी नहीं है और उन्हें इसकी जानकारी मीडिया के जरिए मिली।
वहीं, नगर निगम के सचिव ने कहा कि उन्हें अभी तक श्रीलेखा का इस्तीफा पत्र नहीं मिला है। नियमों के मुताबिक इस्तीफा नगर निगम के सचिव को सौंपा जाना चाहिए। दूसरी ओर, मेयर वी.वी. राजेश ने कहा कि उनके पास श्रीलेखा का इस्तीफा पत्र मौजूद है।
इस्तीफा मेयर को दिए जाने और सचिव को नहीं सौंपे जाने के कारण अब यह भी चर्चा है कि क्या श्रीलेखा को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाया जा सकता है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर फिलहाल राजधानी से बाहर हैं।
श्रीलेखा का इस्तीफा उनके चुनावी राजनीति में कदम रखने के एक साल से भी कम समय में आया है। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भाजपा के हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार के तौर पर नगर निगम चुनाव लड़ा था। उनकी उम्मीदवारी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया था क्योंकि ऐसी चर्चा थी कि निगम में भाजपा के सत्ता में आने पर उन्हें मेयर बनाया जा सकता है।
101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। निर्दलीय पार्षद पी. राधाकृष्णन के समर्थन से भाजपा ने निगम में अपना प्रशासन बनाया। हालांकि, जब मेयर का चुनाव हुआ तो श्रीलेखा को यह पद नहीं मिला। भाजपा नेता और पूर्णकालिक राजनेता वी.वी. राजेश को मेयर बनाया गया। इस फैसले से श्रीलेखा के समर्थकों में निराशा की बात सामने आई थी और भाजपा के भीतर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना था।
नगर निगम में प्रवेश के समय से ही श्रीलेखा और पार्टी नेतृत्व के कुछ वर्गों के बीच मतभेद सामने आने की खबरें आती रही थीं। हालांकि, इस्तीफे के लिए श्रीलेखा ने केवल व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उनके इस्तीफे के बाद इन कथित मतभेदों की चर्चा फिर तेज हो गई है।
नगर निगम चुनाव में जीत के कुछ महीने बाद भाजपा ने श्रीलेखा को वट्टियोरकावु विधानसभा सीट से भी उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रही थीं।
फिलहाल भाजपा के पास 50 पार्षदों का समर्थन है। श्रीलेखा के इस्तीफे के बाद पार्टी की संख्या 49 रह जाएगी। 101 सदस्यीय निगम में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
शास्तमंगलम वार्ड में उपचुनाव की संभावना भी श्रीलेखा के इस्तीफे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना सकती है। इस बीच, राज्य भाजपा नेतृत्व श्रीलेखा को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।
-–आईएएनएस
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