कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला जत्था 20 जून को नाथुला के रास्ते तिब्बत में प्रवेश करेगा
गंगटोक, 12 जून (आईएएनएस)। नाथुला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 15 जून को सिक्किम पहुंचने के बाद 20 जून को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में प्रवेश करेगा।
सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अध्यक्ष लोकेंद्र रसैली ने बताया कि तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुंच चुका है और वर्तमान में विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा समन्वित अनिवार्य चिकित्सा जांच, फिटनेस मूल्यांकन, वीजा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं से गुजर रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले जत्थे ने अपनी यात्रा शुरू कर दी है। तीर्थयात्री दिल्ली में चिकित्सा और दस्तावेजीकरण संबंधी प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं और उनके 15 जून को गंगटोक पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद वे 20 जून को नाथुला होते हुए तिब्बत के लिए रवाना होंगे।
नाथुला होते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा 2015 में इस पवित्र तीर्थ स्थल के वैकल्पिक मार्ग के रूप में शुरू की गई थी। इस वर्ष, देश भर से लगभग 1,500 आवेदकों में से विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से 500 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया है। चयनित तीर्थयात्री 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में यात्रा करेंगे, और अंतिम जत्थे के अगस्त में अपनी यात्रा शुरू करने की उम्मीद है।
गंगटोक पहुंचने के बाद तीर्थयात्री उच्च-ऊंचाई वाले वातावरण के लिए तैयार होने के लिए एक सुनियोजित अनुकूलन कार्यक्रम से गुजरेंगे। वे लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित 18वें मील के पहले अनुकूलन केंद्र में दो रातें बिताएंगे, जिसके बाद वे लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हांगू झील में दो रातें बिताएंगे।
अनुकूलन चरण में स्थानीय भ्रमण, चिकित्सा निगरानी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा अंतिम स्वास्थ्य मूल्यांकन शामिल है, जिसके बाद तीर्थयात्रियों को 14,140 फीट की ऊंचाई पर स्थित नाथुला दर्रे को पार करने की अनुमति दी जाती है।
तिब्बत में प्रवेश करने के बाद, तीर्थयात्री कांगमा, लाजी, झोंगबा और कैलाश पर्वत के प्रवेश द्वार दारचेन से होकर गुजरेंगे। इस पवित्र तीर्थयात्रा में पूजनीय कैलाश परिक्रमा शामिल है और फिर उसी मार्ग से भारत वापसी होती है।
22 दिनों की इस तीर्थयात्रा में दिल्ली में दस्तावेजीकरण और स्वास्थ्य जांच के लिए चार दिन, सिक्किम में मौसम के अनुकूल होने के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन शामिल हैं। चिकित्सा दल, संपर्क अधिकारी और विदेश मंत्रालय, आईटीबीपी, आयुष मंत्रालय और सिक्किम सरकार के अधिकारी इस तीर्थयात्रा की देखरेख करेंगे।
--आईएएनएस
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