फीफा ने नस्लभेदी इशारा करने के आरोपों से ऑस्ट्रेलियाई वीएआर इवांस को बरी किया
नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। जर्मनी और कुराकाओ के बीच रविवार को खेले जाने वाले मुकाबले से पहले नस्लभेदी इशारा करने के आरोपी ऑस्ट्रेलियाई रेफरी शॉन इवांस को फीफा ने आरोपों से बरी कर दिया है।
मुकाबले से पहले ब्रॉडकास्ट में वीडियो रिव्यू टीम ने ऑस्ट्रेलियाई एनालिस्ट को उल्टा 'ओके' का इशारा करते हुए पाया। इस इशारे को अक्सर 'व्हाइट सुप्रीमेसी' (श्वेत वर्चस्व) समूहों से जोड़ा जाता है।
वर्ष 2017 से फीफा की रेफरी सूची में शामिल 38 वर्षीय शॉन इवांस एक अनुभवी वीएआर हैं। वर्ष 2022 में कतर में आयोजित वर्ल्ड कप में उनको रेफरी की भूमिका निभाने के लिए भी नियुक्त किया गया था।
आरोपों पर अपने बयान में शॉन इवांस ने कहा कि यह इशारा "अनजाने में" हुआ था। उन्होंने एक बयान में कहा, "मैं यह साफ करना चाहता हूं कि मैंने जानबूझकर कोई हाथ का इशारा या प्रतीक नहीं बनाया जिससे कोई संदेश, जुड़ाव, खेल या किसी तरह की मान्यता जाहिर हो।"
उन्होंने कहा, "मैं बस यही कह सकता हूं कि यह हरकत अनजाने में, अवचेतन मन से हुई थी और मुझे उस समय पता भी नहीं चला कि मैंने ऐसा किया है। मैच के दौरान और बाद में ली गई तस्वीरों से पता चला कि मैंने अपनी उंगलियों के बीच पेन पकड़े हुए कई बार यह हरकत दोहराई थी।"
शॉन इवांस की ओर से आगे कहा गया, "इस घटना के बाद जो कवरेज हुआ, वह मेरी असलियत नहीं दिखाता। बेशक, मैं समझता हूं कि इस इशारे का क्या मतलब निकाला गया है; मुझे इसका अफसोस है। हालांकि, मैं बिल्कुल साफ तौर पर और जोर देकर कहना चाहता हूं कि मैंने जानबूझकर या इरादतन वह हाथ का निशान नहीं बनाया, जिसके बारे में कहा जा रहा है। विश्व कप में रेफरी की भूमिका निभाना मेरे करियर का सबसे बड़ा सम्मान है और मैं टूर्नामेंट के बाकी समय में अपने साथियों का समर्थन करने के लिए उत्सुक हूं।"
मामले की जांच के बाद, फीफा की ओर से कहा गया कि इवांस के बयान पर गौर करने के बाद फीफा के अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का "कोई सबूत" नहीं मिला। फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति पुष्टि कर सकती है कि सपोर्ट वीडियो असिस्टेंट रेफरी शॉन इवांस से जुड़े मामले की जांच करने के बाद, उसे फीफा के अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला है।
गवर्निंग बॉडी ने अपने बयान में कहा, "अनुशासनात्मक समिति ने मिस्टर इवांस के बयान पर भी ध्यान दिया है।"
बता दें कि मजाक करने के लिए उल्टा 'ओके' का इशारा किया जाता है। इसको क्लासिक "सर्कल गेम" (और सिटकॉम 'मैल्कम इन द मिडल') ने मशहूर किया था। लेकिन वर्ष 2017 में 'ओके' के निशान का इस्तेमाल 'फार-राइट' (कट्टर दक्षिणपंथी) समूहों की ओर से एक-दूसरे से बातचीत करने के लिए भी किया जाने लगा।
वर्ष 2019 में एंटी-डिफेमेशन लीग (एडीएल) ने इस निशान को नफरत फैलाने वाले प्रतीकों की सूची में शामिल कर दिया।
--आईएएनएस
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