Aapka Rajasthan

भारत में त्योहारी सीजन में भर्ती में 15-20 प्रतिशत उछाल की उम्मीद, 2.5 लाख तक अस्थायी रोजगार सृजित होने की संभावना: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में त्योहारी सीजन के दौरान भर्ती में 2026 की दूसरी छमाही में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 2-2.5 लाख तक अस्थायी, संविदा और गिग आधारित रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। गुरुवार को जारी भर्ती समाधान तथा वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
 

नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में त्योहारी सीजन के दौरान भर्ती में 2026 की दूसरी छमाही में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 2-2.5 लाख तक अस्थायी, संविदा और गिग आधारित रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। गुरुवार को जारी भर्ती समाधान तथा वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, खुदरा व्यापार, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और उपभोक्ता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक भर्ती होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस वर्ष केवल भर्ती संख्या नहीं बढ़ रही है, बल्कि कंपनियों की भर्ती रणनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पहले कंपनियां त्योहारी मांग बढ़ने पर अंतिम समय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करती थीं, वहीं अब वे अधिक सुनियोजित तरीके से कार्यबल की तैयारी कर रही हैं। कई कंपनियां अब त्योहारी सीजन शुरू होने से 12 से 14 सप्ताह पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर रही हैं ताकि संचालन संबंधी चुनौतियों से बचा जा सके।

एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) प्रमुख वरुण सचदेवा ने कहा कि अब त्योहारी सीजन भारत के श्रम बाजार के लिए एक तरह की वास्तविक परीक्षा बन चुका है और इससे नियोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा, "नियोक्ता पहले से अधिक तेजी से भर्ती कर रहे हैं, पारंपरिक प्रतिभा केंद्रों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में प्रतिभा तलाश रहे हैं और प्रौद्योगिकी आधारित, लचीले तथा तुरंत काम के लिए तैयार कर्मचारियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।"

सचदेवा के अनुसार, जो कभी केवल मौसमी जरूरतों को पूरा करने का उपाय माना जाता था, वह अब कंपनियों के लिए नई प्रतिभाओं की पहचान करने और भविष्य के स्थायी कर्मचारियों का आधार तैयार करने का रणनीतिक अवसर बन गया है। उनका मानना है कि त्योहारी भर्ती का प्रभाव अब केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय के रोजगार अवसरों में भी बदल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक रूप से डिलीवरी, गोदाम प्रबंधन, फील्ड संचालन और आतिथ्य क्षेत्र भर्ती के प्रमुख स्रोत बने रहेंगे। हालांकि तकनीक आधारित उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण कई नई भूमिकाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिनमें डार्क स्टोर इन्वेंट्री नियंत्रक, रिटर्न और रिफंड विशेषज्ञ, ग्राहक समाधान अधिकारी, मार्केटप्लेस संचालन विशेषज्ञ, धोखाधड़ी एवं लेनदेन सहायता कर्मी, कैटलॉग प्रबंधन अधिकारी और ऑर्डर प्रबंधन विशेषज्ञ जैसी नौकरियां शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव दर्शाता है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जो नौकरियां पहले केवल परिचालन आधारित मानी जाती थीं, वे अब डेटा, स्वचालन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय के निर्णयों पर अधिक निर्भर हो गई हैं।

एक और महत्वपूर्ण रुझान यह है कि त्योहारी भर्ती अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल त्योहारी भर्ती मांग का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा ऐसे शहरों से आने की संभावना है और इन बाजारों में भर्ती 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोजगार अवसर अधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, संगठित खुदरा व्यापार और क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क के विस्तार से इन शहरों में भर्ती गतिविधियों को बल मिल रहा है।

--आईएएनएस

डीबीपी