एफबीआई ने पंजाब के गैंगस्टर नीतीश कौशल को संगठित अपराध मामले में किया गिरफ्तार
वाशिंगटन, 17 जुलाई (आईएएनएस)। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने भारतीय नागरिक नीतीश कौशल को वर्मोंट से गिरफ्तार किया है। कुछ दिनों पहले ही उसे अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाला गया था। यह गिरफ्तारी पंजाब के एक कथित सीमा-पार संगठित अपराध सिंडिकेट पर अमेरिका में चल रहे बड़े मामले में एक बड़ी कार्रवाई है। इस सिंडिकेट पर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया में काम करने का आरोप है।
एफबीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुरुवार को बताया, "केस अपडेट: नीतीश कौशल को वरमोंट में गिरफ्तार कर लिया गया है।"
ब्यूरो ने आपराधिक गिरोहों से जुड़े मामलों में वांछित अन्य फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए भी जनता से सहयोग की अपील की।
कौशल को लाला" के नाम से भी जाना जाता है। लाला के लिए 25 जून को मध्य कैलिफोर्निया के लिए संयुक्त राज्य जिला न्यायालय ने एक फेडरल अरेस्ट वारंट जारी किया था, जब एक ग्रैंड जूरी ने उस पर रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशन्स (आरआईसीओ) साजिश का आरोप लगाया था।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस को 44 पेज के फेडरल चार्जशीट की एक कॉपी मिली, जिसमें आरोप है कि जग्गू भगवानपुरिया संगठित अपराध समूहों के एक सीमा-पार आपराधिक सिंडिकेट के तौर पर काम करता था। इसका हेडक्वार्टर भारत में था और इसके सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में फैले हुए थे।
वकीलों का आरोप है कि इस संगठन के दुनिया भर में 1,000 से ज्यादा सदस्य और सहयोगी थे, जिसमें अमेरिका में 100 से ज्यादा सदस्य शामिल थे। यह हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी से कमाई करता था।
चार्जशीट में 15 आरोपियों के नाम हैं, जिनमें कथित गैंग लीडर जग्गू भगवानपुरिया, कौशल और संगठन के कई अन्य कथित सदस्य शामिल हैं।
इस हफ्ते की शुरुआत में, एफबीआई ने कौशल को अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाल दिया था, और आरोप लगाया था कि वह एक सीमा-पार आपराधिक संगठन में शामिल था, जो दूसरी चीजों के अलावा, हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, फिरौती, हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे कामों में शामिल था।"
एफबीआई के अनुसार, यह संगठन भारत के पंजाब राज्य में शुरू हुआ और कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट और दूसरी जगहों पर काम करता था। ब्यूरो ने यह भी आरोप लगाया कि कौशल ने जग्गू भगवानपुरिया संगठित अपराध समूह की तरफ से हिंसा के काम किए, जिसमें अपहरण और हमले शामिल हैं। इसके साथ ही एफबीआई ने चेतावनी दी कि उसे हथियारबंद और खतरनाक माना जाना चाहिए और उसके भागने का खतरा है।
आईएएनएस को मिले चार्जशीट के अनुसार, इस संगठन के कथित फाउंडर जग्गू भगवानपुरिया, एक समय जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े थे, और फिर उन्होंने एक स्वतंत्र आपराधिक नेटवर्क बनाया। अभियोजक का कहना है कि यह नेटवर्क आखिरकार एक विरोधी संगठन बन गया जिसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान थी।
अभियोग पत्र के अनुसार, कौशल की भूमिका संगठन की ओर से अपहरण और हमलों जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने की थी।
उसके खिलाफ प्रमुख आरोपों में से एक 10 जुलाई 2024 की घटना से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गिरोह के सदस्यों को शक था कि एक व्यक्ति ने संगठन की ड्रग्स की खेप चुरा ली थी। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, गिरोह के एक सहयोगी ने उस व्यक्ति को कैलिफोर्निया के मैन्टेका स्थित एक मकान में बुलाया।
अभियोग पत्र में आरोप लगाया गया है कि कौशल, उसके सह-आरोपी अमृतपाल सिंह बल, हर्षप्रीत सिंह और अमरबीर सिंह ने मिलकर पीड़ित को बंधक बना लिया। अभियोजन पक्ष का यह भी आरोप है कि कौशल और हर्षप्रीत सिंह ने पीड़ित के साथ मारपीट की, जिसके बाद कौशल, अमृतपाल सिंह बल और अमरबीर सिंह उसे कैलिफोर्निया के फ्रेज़्नो स्थित एक अपार्टमेंट में ले गए।
फेडरल अभियोजकों का आरोप है कि पीड़ित को बंधक बनाकर रखा गया और गिरोह के सदस्यों ने उससे 50,000 डॉलर की मांग की। उनका दावा था कि यह रकम उस ड्रग्स की खेप के बदले मुआवजा है, जिसे उनके अनुसार पीड़ित ने चुरा लिया था।
अभियोग पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि बाद में जग्गू भगवानपुरिया ने संगठन के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद को सुलझाने के प्रयास में पीड़ित को रिहा करने का निर्देश दिया।
अभियोग पत्र के अनुसार, यह आपराधिक संगठन अपनी आय के प्रमुख स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी पर निर्भर था। अभियोजकों का कहना है कि गिरोह के सदस्य अमेरिका में कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी के लिए परिवहन मार्गों का समन्वय करते थे। कथित तौर पर, मादक पदार्थों की खेप पहले दक्षिणी कैलिफोर्निया में एकत्र की जाती थी और फिर लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों के जरिए पूर्वी अमेरिका या अमेरिका-कनाडा सीमा तक भेजी जाती थी।
अभियोजकों के मुताबिक, तस्करी की प्रत्येक खेप में आमतौर पर 100 किलोग्राम या उससे अधिक कोकीन या मेथामफेटामाइन होती थी।
अभियोजकों का यह भी आरोप है कि गिरोह सुपारी लेकर हत्याएं (मर्डर-फॉर-हायर) करने, प्रतिद्वंद्वी तस्करी गिरोहों से कोकीन लूटने और ड्रग्स की खेप चोरी करने के संदेह में लोगों के खिलाफ हिंसा करने में शामिल था।
अभियोग पत्र के अनुसार, मादक पदार्थों की तस्करी, उगाही और अन्य आपराधिक गतिविधियों से होने वाली कमाई भारत में संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक भेजी जाती थी।
अदालती दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरोह के सदस्य उगाही के लिए निशाना बनाए गए लोगों और उनके परिजनों, विशेषकर भारत में रहने वाले परिवार के सदस्यों, की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद वे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए धमकियां देकर पैसे की मांग करते थे।
अभियोजकों के मुताबिक, कुछ मामलों में गिरोह के सदस्य पंजाब के भ्रष्ट कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के साथ मिलकर अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज करवाते थे और बाद में उन मामलों को वापस लेने के बदले पैसे की मांग करते थे।
चार्जशीट में यह भी आरोप है कि संगठन ने हथियारों की तस्करी की, नेवाडा में स्ट्रॉ परचेजर से हथियार खरीदे और फिर उन्हें अमेरिका में बेच दिया या कनाडा में स्मगल कर दिया। अभियोजक का यह भी दावा है कि गैंग ने पंजाब में नाबालिगों समेत कमजोर युवाओं को पैसे, बदनामी, ताकत और भारत छोड़ने के मौकों का वादा करके भर्ती किया। कोर्ट फाइलिंग में आरोप है कि कुछ लोगों को संगठन की तरफ से हत्या करने के लिए सिर्फ 20,000 रुपये (लगभग 200 डॉलर) दिए गए थे और बाद में वफादार सदस्यों को अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में काम करने के मौके दिए गए।
कौशल पर आरोप लगने के बाद, फेडरल वकीलों ने उसे ट्रायल से पहले हिरासत में रखने की मांग की। उन्होंने यह तर्क दिया कि कोई भी परिस्थिति कोर्ट में उसकी पेशी या समुदाय की सुरक्षा को ठीक से सुनिश्चित नहीं कर सकती है। कोर्ट की फाइलिंग में कहा गया है कि उसके भागने का खतरा था और वह समुदाय के लिए खतरा था।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि वह एक एलियन था जिसे कानूनी तौर पर स्थायी निवासी के लिए मंजूरी नहीं मिली थी।
भगवानपुरिया समूह पंजाब के कई संगठित अपराध सिंडिकेट में से एक है, जिसने अपने कथित अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स की वजह से भारत और विदेश में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का ध्यान तेजी से खींचा है।
हाल के सालों में, अमेरिकी अधिकारियों ने भारत समेत साझेदार देशों के साथ मिलकर काम बढ़ाया है। इन देशों पर अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और क्रॉस-बॉर्डर फाइनेंशियल चैनलों का इस्तेमाल करके संगठित अपराध को बढ़ावा देने के आरोप हैं।
हाल के वर्षों में अमेरिकी अधिकारियों ने भारत समेत कई साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है, ताकि उन आपराधिक नेटवर्क की जांच की जा सके जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रवासन, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और सीमा-पार वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल कर संगठित अपराध को बढ़ावा देने का आरोप है।
कौशल की गिरफ्तारी को इस सप्ताह की शुरुआत में एफबीआई द्वारा सूचना देने की अपील के बाद सार्वजनिक रूप से घोषित की गई पहली गिरफ्तारी माना जा रहा है।
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभियोग पत्र में लगाए गए आरोपों की अभी अदालत में पुष्टि नहीं हुई है। कानून के तहत कौशल को तब तक निर्दोष माना जाएगा, जब तक अदालत में संदेह से परे उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं मिल जाता।
--आईएएनएस
केके/पीएम
