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तमिलनाडु: पनामरथुपट्टी झील के पुनरुद्धार की मांग तेज, किसानों ने सुझाया अतिरिक्त पानी मोड़ने का विकल्प

सेलम, 9 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सलेम जिले के किसानों और जल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने विशाल पनामरथुपट्टी झील के पुनरुद्धार की मांग तेज कर दी है। उन्होंने झील में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मेट्टूर जल प्रणाली से अतिरिक्त पानी मोड़ने और जलाशय के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके सीमाई करुवेलम पेड़ों को हटाने की मांग की है।
 

सेलम, 9 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सलेम जिले के किसानों और जल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने विशाल पनामरथुपट्टी झील के पुनरुद्धार की मांग तेज कर दी है। उन्होंने झील में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मेट्टूर जल प्रणाली से अतिरिक्त पानी मोड़ने और जलाशय के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुके सीमाई करुवेलम पेड़ों को हटाने की मांग की है।

लगभग 2,140 एकड़ में फैली और तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरी पनामरथुपट्टी झील कभी सलेम शहर और रासीपुरम के लिए पीने के पानी का एक अहम स्रोत थी, हालांकि पिछले लगभग दो दशकों से इस झील में अधिक पानी नहीं है, जिससे आसपास के इलाकों में भूजल की उपलब्धता और खेती पर असर पड़ा है।

किसानों का कहना है कि यह जलाशय पर्यावरण और जल-विज्ञान के नजरिए से बहुत अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि यह इलाके की कई छोटी झीलों और जल-धाराओं से जुड़ा हुआ है। इसके जीर्णोद्धार से लगभग 10 गांवों को फायदा हो सकता है और साथ ही भूजल रिचार्ज और खेती की संभावनाओं में भी सुधार हो सकता है।

किसानों ने अधिकारियों से अपील की है कि वे मेट्टूर सिस्टम से कावेरी का अतिरिक्त पानी पनामारथुपट्टी तक लाने की संभावना पर विचार करें।

किसानों का कहना है कि पूलमपट्टी क्षेत्र से अतिरिक्त पानी पंप करने की मौजूदा परियोजना पहले से मौजूद है। इस परियोजना के नेटवर्क और मार्ग का अध्ययन कर यह देखा जा सकता है कि क्या अतिरिक्त पानी को पनामरथुपट्टी झील तक मोड़ा जा सकता है। झील के पुनरुद्धार की शुरुआत सीमाई करुवेलम के पेड़ों और प्राकृतिक जल प्रवाह मार्गों में बाधा बन रहे अतिक्रमणों को हटाने से की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि झील की तलहटी की स्थिति का आकलन किया जाए, ताकि उसकी जल भंडारण क्षमता को बेहतर बनाया जा सके।

वहीं, जल संरक्षण कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत में झील के कुछ हिस्सों में सफाई अभियान शुरू किया गया था, लेकिन ठेकेदार की निविदा अवधि समाप्त होने के बाद यह काम रुक गया। उनका कहना है कि झील के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए इन कार्यों को जल्द फिर से शुरू किया जाना चाहिए।

हालांकि कुछ इलाकों को साफ कर दिया गया था, लेकिन झील के तल पर आक्रामक वनस्पतियों का तेजी से फैलना जारी है, जिससे पानी जमा करने की क्षमता कम हो रही है और पानी का प्राकृतिक बहाव भी बाधित हो रहा है। उन्होंने झील का प्रबंधन करने वाली सलेम सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से सफाई का काम फिर से शुरू करने और झील के जीर्णोद्धार के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने का आग्रह किया है।

चूंकि झील अपेक्षाकृत ऊंचे स्थान पर स्थित है, इसलिए योजना के हिस्से के रूप में झील में पानी पंप करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।

कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि फरवरी से टेंडर के जरिए जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा था, लेकिन कॉन्ट्रेक्ट की अवधि समाप्त होने के बाद ठेकेदार ने काम छोड़ दिया। अब नगर निकाय एक नया टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि 'सीमा करुवेलम' (एक आक्रामक वनस्पति) को हटाना तत्काल प्राथमिकता होगी। जीर्णोद्धार का काम आगे बढ़ने के साथ ही मेट्टूर से अतिरिक्त पानी लाने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा।

किसानों का मानना ​​है कि झील को पुनर्जीवित करने से भूजल संसाधनों को काफी मजबूती मिल सकती है और आसपास के गांवों में सिंचाई की संभावनाओं में सुधार हो सकता है।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी