पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल क्षमता अमेरिका के लिए खतरा, तुलसी गबार्ड ने की सख्त रुख अपनाने की मांग
वॉशिंगटन, 21 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल क्षमता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कहा है कि जिस तरह इस्लामाबाद बैलेस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता को बढ़ा रहा है, ऐसे में वे बहुत जल्द अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। लगातार प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय अलगाव और परमाणु हथियारों का विस्तार से पाकिस्तान का रास्ता अब उत्तर कोरिया जैसा दिखाई दे रहा है। इससे अमेरिका के लिए खतरा बढ़ रहा है।
उनका कहना है कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच आतंकी नेटवर्क फल-फूल रहा हैं, ऐसे में हताशा से तबाही मचने से पहले अमेरिका को और सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।
तुलसी गबार्ड ने 2026 के अपने खतरे के आकलन को सीनेटरों के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि पाकिस्तान की नई और उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें परमाणु या पारंपरिक युद्धक हथियारों से लैस हैं, जिनकी मारक क्षमता संभावित रूप से महाद्वीपीय अमेरिका तक बढ़ती जा रही है। यह उन पूर्व आकलनों से एक बदलाव है, जिनमें पाकिस्तानी मिसाइलों को दक्षिण एशिया तक सीमित माना गया था।
पाकिस्तान केवल परमाणु हथियारों की संख्या ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि उनकी तकनीक भी ज्यादा आधुनिक बना रहा है। इसमें अबाबील जैसी मिसाइलों पर एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने वाली क्षमता विकसित करने की बात कही गई है। भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता और चीन से मिली तकनीकी मदद के कारण पाकिस्तान की सैन्य क्षमता सिर्फ रक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं रह गई है।
अमेरिका ने इस पर रोक लगाने के लिए कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं। दिसंबर में अमेरिकी ट्रेजरी ने पाकिस्तान की चार संस्थाओं पर कार्रवाई की थी, जिनमें नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स भी शामिल था। इन पर मिसाइलों से जुड़े उपकरण हासिल करने का आरोप था। बाद में अप्रैल 2025 में 19 और कंपनियों पर भी परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े कामों के लिए प्रतिबंध लगाए गए। इनमें कई कंपनियों के चीन से जुड़े सप्लाई नेटवर्क का जिक्र किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं। इससे परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाती है। रिपोर्ट ने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस देश में वह एबटाबाद में छिपा मिला था, उस देश पर परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है।
उनके मुताबिक अमेरिका को पाकिस्तान के मामले में ज्यादा सख्त नीति अपनाने की जरूरत है, क्योंकि आर्थिक संकट, मिसाइल कार्यक्रम और आतंकी ढांचे का यह मेल आगे चलकर बड़ा खतरा बन सकता है।
--आईएएनएस
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