मिडिल ईस्ट संकट: ईयू ने प्रभावित सेक्टरों की अस्थायी मदद का फ्रेमवर्क लागू किया
ब्रुसेल्स, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोपीय आयोग ने बुधवार को एक अस्थायी स्टेट एड फ्रेमवर्क अपनाया है, ताकि यूरोपीय संघ (ईयू) के देश मिडिल ईस्ट संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत से प्रभावित सेक्टरों को सहारा दे सकें।
इस नए फ्रेमवर्क का नाम है मिडिल ईस्ट क्राइसिस टेम्पररी स्टेट एड फ्रेमवर्क (मेटसेफ), जो 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इसका फोकस उन सेक्टरों पर है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जैसे कृषि, मछली पालन, परिवहन और ज्यादा ऊर्जा इस्तेमाल करने वाले उद्योग।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने कहा कि इस फ्रेमवर्क के नियम, दायरा और समय-सीमा को हालात के हिसाब से समय-समय पर बदला जा सकता है, खासकर मिडिल ईस्ट की स्थिति और दुनिया की आर्थिक हालत को देखते हुए।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईयू के अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष यूरोप के लिए ऊर्जा आयात काफी महंगा बना रहा है। आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बताया कि सिर्फ 60 दिनों में ईयू का फॉसिल फ्यूल आयात बिल 27 अरब यूरो से ज्यादा बढ़ गया है।
ईयू के ऊर्जा आयुक्त डैन जॉर्गेनसन ने भी कहा कि यह सिर्फ थोड़े समय के लिए कीमत बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह स्थिति 1973 और 2022 के ऊर्जा संकट जितनी गंभीर हो सकती है।
आयोग के मुताबिक, साफ और हरित ऊर्जा की तरफ बढ़ना ही लंबे समय में इसका समाधान है, लेकिन अभी के लिए यह नया फ्रेमवर्क देशों को तुरंत कदम उठाने की सुविधा देता है, ताकि प्रभावित कंपनियों का विकास रुक न जाए।
इस योजना के तहत कृषि, मछली पालन और परिवहन सेक्टर की कंपनियों को अलग-अलग तरह से मदद दी जाएगी। जैसे ईंधन या खाद की बढ़ी कीमतों का कुछ हिस्सा कवर करने के लिए सहायता और छोटे स्तर की मदद के लिए आसान प्रक्रिया।
'मेटसेफ' में एक और बदलाव किया गया है, जिसमें क्लीन इंडस्ट्रियल डील स्टेट एड फ्रेमवर्क (सीआईएसएएफ) को थोड़ी छूट दी गई है, ताकि बिजली की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से निपटने के लिए ज्यादा मदद दी जा सके।
यूरोपियन कमीशन फॉर ए क्लीन, जस्ट एंड कॉम्पिटिटिव ट्रांज़िशन की एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट टेरेसा रिबेरा ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी तुरंत कार्रवाई की मांग करती है।
उन्होंने कहा कि यह नया फ्रेमवर्क आसान और व्यावहारिक तरीके देता है, जिससे कृषि, मछली पालन और परिवहन जैसे जरूरी सेक्टरों पर असर कम किया जा सके।
--आईएएनएस
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