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ईस्टर्न रेलवे ने हेरिटेज सेलिब्रेशन के साथ बैरकपुर स्टेशन की 164वीं सालगिरह मनाई

कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। ईस्टर्न रेलवे (ईआर) ने हेरिटेज बैरकपुर स्टेशन की 164वीं सालगिरह एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ मनाई। बैरकपुर रेलवे स्टेशन 1862 में बनाया गया था, जिसका मुख्य मकसद देश की पहली मिलिट्री छावनी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से जोड़ना था।
 

कोलकाता, 17 अगस्त (आईएएनएस)। ईस्टर्न रेलवे (ईआर) ने हेरिटेज बैरकपुर स्टेशन की 164वीं सालगिरह एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ मनाई। बैरकपुर रेलवे स्टेशन 1862 में बनाया गया था, जिसका मुख्य मकसद देश की पहली मिलिट्री छावनी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से जोड़ना था।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1772 में बैरकपुर में मिलिट्री गैरीसन और छावनी बनाई थी। वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1775 में औपचारिक रूप से छावनी बोर्ड की घोषणा की। तब से, इस जगह ने भारतीय इतिहास की कई अहम घटनाओं को देखा है, जिसमें वह घटना भी शामिल है जिसे अंग्रेजों ने '1824 का बैरकपुर विद्रोह' कहा था।

सिपाही बिंदी तिवारी की अगुवाई में 47वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने पहले एंग्लो-बर्मी युद्ध में हिस्सा लेने के लिए बर्मा (अब म्यांमार) जाने से इनकार कर दिया। आखिर में अंग्रेजों ने तोपों का इस्तेमाल करके उन सैनिकों का नरसंहार कर दिया।

1857 में मंगल पांडे ने अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की। कुछ इतिहासकारों का मानना ​​है कि यहीं से देश की आजादी की पहली लड़ाई की शुरुआत हुई थी।

रेलवे के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि हालांकि स्टेशन कुछ साल बाद बना, लेकिन उसके बाद इसने भारत के इतिहास की कई दिलचस्प घटनाओं को देखा। आजादी की लड़ाई लड़ने वालों ने इस स्टेशन का काफी इस्तेमाल किया।

ये जश्न रेल मंत्रालय की 'स्टेशन महोत्सव' पहल का हिस्सा थे। इस पहल का मकसद हेरिटेज स्टेशनों को उनके बनने के साल के हिसाब से सेलिब्रेट करना है। भारतीय रेलवे नेटवर्क के 100 से ज्यादा स्टेशनों को इन आयोजनों के लिए चुना गया है, ताकि उनकी ऐतिहासिक विरासत और रेलवे सिस्टम व आस-पास के इलाकों में उनके योगदान को दिखाया जा सके।

अधिकारी ने आगे कहा कि बैरकपुर स्टेशन देश के सबसे पुराने सबअर्बन स्टेशनों में से एक है। इसने बैरकपुर को औपनिवेशिक दौर से आधुनिक भारत में बदलते देखा है और साथ ही एक अहम ट्रांजिट हब के तौर पर अपनी सेवा भी जारी रखी है।

इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्कूली छात्रों ने भारत की आजादी और आजादी की लड़ाई के दौरान झेली गई मुश्किलों पर अपने शिक्षकों की लिखी कविताएं सुनाईं। एक खास वीडियो स्क्रीनिंग में बैरकपुर स्टेशन के ऐतिहासिक शुरुआती दौर से लेकर आज की भूमिका तक के सफर को दिखाया गया।

भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सदस्यों ने मंगल पांडे के ऐतिहासिक संघर्ष और विरोध की भावना को दिखाने वाला एक नाटक पेश किया। उन्होंने मंगल पांडे और दूसरे गुमनाम आजादी के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। स्टेशन की विरासत को उसके वर्तमान से जोड़ते हुए, रिटायर हो चुके रेलवे कर्मचारियों को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया।

यह पहल न केवल सालगिरह मनाने का एक जरिया थी, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय रेलवे की विरासत और साहस व देशभक्ति के मूल्यों से फिर से जोड़ने का एक मौका भी थी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के जोश भरे गायन के साथ हुआ।

--आईएएनएस

एमएस/