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पेपर लीक और घोटालों की वजह से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है : शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और महाराष्ट्र इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा शिकार हुआ है।
 

मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और महाराष्ट्र इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा शिकार हुआ है।

गुरुवार को पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में राज्य और केंद्र के शैक्षिक ढांचे की कड़ी आलोचना की गई। दावा किया कि परीक्षा पेपर लीक होना,पैमाने पर खरे नहीं उतरने वाले वाइस-चांसलर की गैर-कानूनी नियुक्तियों और बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों ने शैक्षणिक ढांचे में गहरी गिरावट के तौर पर काम किया है।

संपादकीय में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक की कड़ी आलोचना की गई। हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि महाराष्ट्र में एक महीने के भीतर दस से ज्यादा परीक्षा के पेपर लीक हुए, और इसके बाद महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के पेपर भी लीक हुए। संपादकीय में चेतावनी दी गई, "दिन-दहाड़े खुलेआम पेपर लीक और ग्रेड की चोरी हो रही है। शिक्षा समाज की नींव है, और अगर यह व्यवस्था चरमरा गई, तो समाज भी इसके साथ ही ढह जाएगा।"

संपादकीय में कहा गया कि महाराष्ट्र की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों को योग्यता के बजाय पक्षपाती एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है।

संपादकीय में भ्रष्टाचार के कुछ खास मामलों का भी जिक्र किया गया, जिसमें परभणी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से जुड़ा करोड़ों रुपए का वित्तीय घोटाला भी शामिल है। इसके अलावा, इसमें जलगांव से भाजपा नेता संजय गरुड़ की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया गया, जो 160 करोड़ रुपए के 'शलार्थ आईडी' घोटाले से जुड़े थे।

सामना संपादकीय में केंद्र सरकार की आलोचना की गई कि उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के हिसाब से इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में बदलाव किए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस, वामपंथियों और समाजवादियों के योगदान को मिटा दिया। इसमें यह भी कहा गया कि अवैज्ञानिक विचारधाराओं को मानने का दबाव शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।

संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने वंचित छात्रों और अमीर उम्मीदवारों के बीच भारी अंतर की ओर इशारा किया। जहां मध्यम वर्गीय माता-पिता महंगी कोचिंग क्लास के लिए कर्ज लेते हैं, वहीं अमीर लोग परीक्षा पास करने के लिए लीक हुए पेपर खरीदते हैं और खास परीक्षा केंद्रों में हेरफेर करते हैं। इसमें कहा गया, "पुणे, जिसे कभी शिक्षा और ज्ञान के केंद्र के रूप में जाना जाता था, अब पेपर लीक के गढ़ के रूप में बदनाम हो गया है।" साथ ही, राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि वह ढांचागत सुधार करने के बजाय बार-बार विशेष जांच टीमें बनाती रहती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस