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रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ ईडी की चार्जशीट दाखिल, 1353 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रहेजा डेवलपर्स, उसके प्रमोटरों और अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि करीब 1,353.26 करोड़ रुपए के होमबायर्स के धन की मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
 

नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रहेजा डेवलपर्स, उसके प्रमोटरों और अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि करीब 1,353.26 करोड़ रुपए के होमबायर्स के धन की मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

ईडी ने 6 नवंबर को पीएमएलए, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत साकेत स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की।

चार्जशीट में रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (आरडीएल), उसके प्रबंध निदेशक नवीन एम. रहेजा, उनके बेटे नयन एन. रहेजा, बेटी नयना एन. सिंघानिया, पत्नी निर्मल रहेजा तथा 16 अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। इन पर पीएमएलए की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग करने और धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध के आरोप लगाए गए हैं।

ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि समूह की परियोजनाओं जैसे रहेजा रिवांटा, अटलांटिस, नवीन मीनार और द दिल्ली मॉल में फ्लैट और कमर्शियल यूनिट खरीदने के लिए भुगतान करने के बावजूद खरीदारों को न तो कब्जा मिला और न ही पैसे वापस किए गए।

जांच में सामने आया कि रहेजा डेवलपर्स ने दिल्ली और गुरुग्राम की आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं में समय पर डिलीवरी का वादा कर करीब 4,600 खरीदारों और निवेशकों से 2,699.13 करोड़ रुपए जुटाए थे।

ईडी के अनुसार, निर्माण कार्य पर खर्च किए जाने के बजाय अब तक 1,353.26 करोड़ रुपए को अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिन्हित किया गया है। इसमें 1,175.86 करोड़ रुपए परियोजना, एस्क्रो और रेरा खातों से निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए निकाले गए, जबकि 177.40 करोड़ रुपए खरीदारों से आधिकारिक समझौतों के बाहर नगद लिए गए।

एजेंसी ने कहा कि समूह की अधिकांश परियोजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं। जांच में यह भी पता चला कि खरीदारों के पैसे को समूह की अन्य कंपनियों और कर्मचारियों तथा उनके रिश्तेदारों के नाम पर संचालित कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। इन पैसों का उपयोग जमीन खरीदने और एक परियोजना के रेरा खाते से दूसरी परियोजना में धन हस्तांतरित करने के लिए किया गया।

ईडी ने 25 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर में 9 ठिकानों और 27 जून 2025 को 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये ठिकाने रहेजा डेवलपर्स, उसके प्रमोटरों, कर्मचारियों और संबद्ध संस्थाओं से जुड़े थे।

छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, आभूषण, सोने के सिक्के, बुलियन और विदेशी मुद्रा जब्त की गई। पीएमएलए की न्यायनिर्णयन प्राधिकरण ने इनकी जब्ती बरकरार रखने की अनुमति भी दे दी है।

ईडी ने 28 अप्रैल और 30 जुलाई के अस्थायी कुर्की आदेशों के माध्यम से 810.57 करोड़ रुपए के बुक वैल्यू तथा 2,399.65 करोड़ रुपए के मौजूदा बाजार मूल्य वाली अचल संपत्तियां भी कुर्क की हैं।

एजेंसी का आरोप है कि नवीन एम. रहेजा, नयन एन. रहेजा, नयना एन. सिंघानिया और निर्मल रहेजा ने जानबूझकर तलाशी कार्रवाई में सहयोग नहीं किया और पीएमएलए की धारा 50 के तहत जारी कई समन का भी पालन नहीं किया।

ईडी ने इन चारों आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग करते हुए साकेत की विशेष अदालत में आवेदन दाखिल किया है।

ईडी ने बताया कि नयन एन. रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका 19 सितंबर को विशेष पीएमएलए अदालत और 15 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है।

मामले में दाखिल अभियोजन शिकायत में कुल 21 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें कई कंपनियां और उनके निदेशक शामिल हैं।

ईडी ने अदालत से कुर्क की गई संपत्तियों को जब्त करने और जांच में शामिल नहीं हो रहे प्रमोटरों तथा परिवार के सदस्यों नवीन रहेजा, नयन रहेजा, नयना सिंघानिया और निर्मल रहेजा को गिरफ्तार किए जाने पर उनकी हिरासत देने की मांग की है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी