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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का एक्शन, पीएसआईईसी अधिकारियों के कई ठिकानों पर छापेमारी

चंडीगढ़, 13 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने चंडीगढ़ और पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में तलाशी अभियान चलाया है। इसके साथ ही ईडी द्वारा पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीएसआईईसी) के ऑफिस में भी सर्वे किया गया।
 

चंडीगढ़, 13 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने चंडीगढ़ और पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में तलाशी अभियान चलाया है। इसके साथ ही ईडी द्वारा पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीएसआईईसी) के ऑफिस में भी सर्वे किया गया।

यह कार्रवाई रिश्तेदारों, दोस्तों और अन्य सहयोगियों के नाम पर इंडस्ट्रियल प्लॉट अलॉट करने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई है। तलाशी के दौरान ईडी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद और जब्त किए गए।

ईडी ने विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। यह एफआईआर 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' और 'भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)' की विभिन्न धाराओं के तहत पीएसआईईसी के कई अधिकारियों और अन्य निजी लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी।

जांच में पता चला कि औद्योगिक प्लॉट ऐसे लोगों को आवंटित किए गए थे, जिन्हें तकनीकी उद्योगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। लोगों ने औद्योगिक प्लॉट के लिए आवेदन करते समय नकली फर्मों और नकली पतों का इस्तेमाल किया और पीएसआईईसी अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों के कारण इन लोगों को औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए गए।

प्लॉट का कब्जा भी तय समय के भीतर नहीं दिया गया और इसमें कई वर्षों की देरी हुई। बीच के समय को 'जीरो पीरियड' माना जाता था और भुगतान योजनाओं के लिए आवंटन की तारीखों को कई वर्ष आगे बढ़ा दिया जाता था, जिसमें उस बीच के समय के लिए ब्याज दर शून्य होती थी।

जांच से पता चला है कि ये अवैध आवंटन भारी रिश्वत के बदले किए गए थे, जो अधिकारियों को नकद लेनदेन और जटिल वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मिली थी। कई आवंटन शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के नाम पर किए गए थे, जिनका इस्तेमाल बाद में आवंटित प्लॉट को मौजूदा बाजार दरों पर बाहरी लोगों को बेचने के लिए किया गया, जिससे भारी कमाई हुई।

इसके अलावा जांच में यह भी पता चला कि उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित प्लॉट को विभाजित करके आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक सबूत इकट्ठा किए गए और 12,15,000 रुपए की नकदी बरामद और जब्त की गई। इसके साथ ही पीएसआईईसी के अधिकारियों-प्रेम चीफ जनरल मैनेजर सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व जनरल मैनेजर जसविंदर सिंह रंधावा के बैंक खातों में मौजूद 4.01 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए गए।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी