डीएमएफ घोटाला: ईडी ने 31.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र
रायपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) निधि के दुरुपयोग के संबंध में लगभग 31.70 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
एजेंसी ने 30 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) में सतपाल सिंह छाबड़ा और मंदीप चावला सहित 17 आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अपराधों के लिए पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया।
अस्थायी कुर्की आदेश 29 अक्टूबर को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत जारी किया गया था। यह मामला खनन प्रभावित क्षेत्रों और समुदायों के कल्याण और विकास के लिए निर्धारित डीएमएफटी निधि के छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से व्यवस्थित रूप से गबन से संबंधित है।
ईडी के एक प्रेस बयान के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों और एजेंटों/बिचौलियों के एक संगठित गिरोह ने इन फंडों के आवंटन और इस्तेमाल में हेरफेर की। उन्होंने ऐसे कामों को प्राथमिकता दी, जिनमें खरीद की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। उन्होंने 'रेट-कॉन्ट्रैक्ट' रखने वाली कंपनियों को दिए गए खरीद ऑर्डरों की कुल कीमत का 25 से 50 प्रतिशत तक अवैध कमीशन वसूला। ईडी का कहना है कि इस कमीशन का एक बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया, ताकि फंड का आवंटन हो सके, खरीद ऑर्डर जारी हो सकें और भुगतान मिल सके।
यह कमीशन नकद और बैंकिंग चैनलों के जरिए वसूला गया और कई कंपनियों व खातों के माध्यम से घुमाया (लेयरिंग) गया। ईडी के मुताबिक, 'बीज निगम' द्वारा गैर-डीएमएफ फंड से की गई खरीदारी में भी इसी तरह का कमीशन वसूला गया था।
छाबड़ा को इस गिरोह के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक माना गया है। आरोप है कि उसने चुनिंदा वेंडरों को काम दिलाने, खरीद ऑर्डर जारी करवाने, भुगतान दिलवाने और अवैध कमीशन वसूलने व बांटने में मदद की। बयान के मुताबिक, ईडी ने उसे 1 सितंबर को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने आरोपी से जुड़ी अपराध की कमाई का आकलन लगभग 35 करोड़ रुपए किया है, जिसके एवज में अब 31.70 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली गई है।
इस मामले में अब तक आईएएस अधिकारी रामू शाऊ सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस मामले की जांच रायपुर के एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी)/इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कांकेर जिले में और रायपुर के एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज की गई अन्य एफआईआर को भी ईडी की 'एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट' (ईसीआईआर) में शामिल कर लिया गया है। डीएमएफ फंड के दुरुपयोग, अवैध कमीशन की वसूली और वितरण, तथा अपराध से प्राप्त धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अन्य एजेंटों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है।
--आईएएनएस
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