पुणे सिविक प्रोजेक्ट मामले में ईडी की कार्रवाई, एक शख्स को किया गिरफ्तार
मुंबई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बिजनेसमैन को पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (पीएमली) के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने के लिए एक सरकारी कंपनी से लिए गए लोन का गलत इस्तेमाल करने और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने 1 जनवरी को द ग्रीन बिलियन्स लिमिटेड (टीजीबीएल) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर प्रतीक कनाकिया को इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
कनाकिया को उसी दिन मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया गया और ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी ने भारत सरकार के पब्लिक सेक्टर के उपक्रम ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल) से 50 करोड़ रुपए का लोन धोखे से लिया और उसे डायवर्ट कर दिया, जिससे बीईसीआईएल को गलत नुकसान हुआ।
2018 में, पुणे नगर निगम ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने और चलाने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया था। यह प्रोजेक्ट 2019 में वेरिएट कंसल्टेंट्स को दिया गया था और बाद में, 2020 में, पीएमसी और वेरिएट पुणे वेस्ट टू एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, जो इस प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) थी, के बीच एक कंसेशन एग्रीमेंट किया गया।
इसके बाद, आरोपी की कंपनी द ग्रीन बिलियन्स लिमिटेड ने एसपीवी को खरीदने के लिए एक बाइंडिंग टर्म शीट पर साइन किए और एक कंसोर्टियम बनाने के लिए बीईसीआईएल से संपर्क किया, जिसके तहत बीईसीआईएल को पीएमसी प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट और फाइनेंशियल पार्टनर के रूप में काम करना था।
बयान में कहा गया है कि 2022 में, इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (आईआरईडीए) ने बीईसीआईएल को 80 करोड़ रुपए का शॉर्ट-टर्म लोन मंजूर किया, जिसमें से 50 करोड़ रुपये बीईसीआईएल ने टीजीबीएल को आगे मंजूर किए।
ईडी की जांच में पता चला कि प्रतीक कनाकिया ने अपनी प्राइवेट फर्म के जरिए और कथित तौर पर बीईसीआईएल के पूर्व कर्मचारियों की मिलीभगत से, जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके और तय शर्तों का पालन किए बिना, पुणे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट के नाम पर धोखे से क्रेडिट सुविधा का फायदा उठाया।
एजेंसी ने कहा कि लोन के पैसे को बाद में डायवर्ट और गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया, और पुणे नगर निगम के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि प्रोजेक्ट साइट पर कोई काम नहीं किया गया था। ईडी के मुताबिक, आरोपी ने अपराध से मिले पैसों का इस्तेमाल अपने पर्सनल खर्चों और शानदार लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए किया, जिसमें लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल और मुंबई और दिल्ली के प्राइम इलाकों में महंगे रिहायशी प्रॉपर्टी को किराए पर लेना और उनका रेनोवेशन करवाना शामिल है। इस तरह उसने झूठी फाइनेंशियल समृद्धि का दिखावा किया।
--आईएएनएस
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