व्यापार करने में आसानी, एफटीए और नीतिगत सुधारों से भारत बना आत्मनिर्भर और विश्वसनीय अर्थव्यवस्था : पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि व्यापार करना आसान बनाने वाली नीतियां, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और लोगों का बढ़ता विश्वास भारत को एक आत्मनिर्भर, मजबूत और दुनिया में भरोसेमंद अर्थव्यवस्था बना रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2025 में किए गए बड़े और मजबूत सुधारों से स्टार्टअप, छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई), निर्यात और निवेश को नई ऊर्जा मिली है।
मंत्री ने कहा कि ये नीतिगत फैसले भारत के भविष्य को मजबूत बना रहे हैं और देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई पहचान दिला रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि व्यापार करने में आसानी, मुक्त व्यापार समझौते और जनता का भरोसा जैसे अहम कदम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रहे हैं।
मंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत तेजी से विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है, ताकि कारोबारियों और उद्यमियों के लिए नए मौके तैयार किए जा सकें।
शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'स्टार्टअप पे चर्चा' कार्यक्रम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि हाल के मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय सामान और सेवाओं को नए विदेशी बाजार मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन समझौतों से निवेशकों को भरोसा और स्थिरता मिलती है, जिससे वे भारत में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि ये व्यापार समझौते स्टार्टअप और उद्यमियों को दुनिया भर में अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के बड़े अवसर दे रहे हैं।
उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स से अपील की कि वे विदेशी स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करें, खासकर सेवा क्षेत्र, परिवहन, डिजिटल भुगतान, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में।
मंत्री ने कहा कि नए भारत में सबसे बड़ा बदलाव युवाओं के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी है।
गोयल ने कहा कि आज के युवा जोखिम लेने से नहीं डरते, अपना खुद का कारोबार शुरू करने और नए विचारों के साथ प्रयोग करने के इच्छुक हैं, जो पहले की मानसिकता से एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है, जब लोग सिर्फ सुरक्षित नौकरी को ही प्राथमिकता देते थे।
--आईएएनएस
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