ई20 पेट्रोल से बेहतर एक्सेलरेशन और कम कार्बन उत्सर्जन, इंजन को नुकसान का कोई सबूत नहीं: सरकार
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में कहा कि ई20 पेट्रोल से वाहन को बेहतर एक्सेलरेशन, स्मूद राइड क्वालिटी और ई10 पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन मिलता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों में एथेनॉल की वजह से इंजन में जंग, असामान्य घिसावट या वाहन की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है, यहां तक कि उन लाखों पुराने वाहनों में भी नहीं, जिन्हें मूल रूप से ई20 के लिए प्रमाणित नहीं किया गया था।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ई20 ईंधन वाहन की राइड क्वालिटी को बेहतर बनाता है और ई10 की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है। मंत्रालय के अनुसार, अधिक एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन अधिक स्वच्छ और पूर्ण दहन सुनिश्चित करता है, जिससे पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) का उत्सर्जन लगभग शून्य हो जाता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
सरकार ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) और विभिन्न वाहन निर्माताओं ने ई20 ईंधन लागू करने से पहले प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड ट्रायल किए थे। इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, वाहन प्रदर्शन, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। इन सभी अध्ययनों ने पुष्टि की कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है।
सरकार ने यह भी कहा कि परीक्षणों से यह साबित हुआ है कि पुराने वाहनों के प्रदर्शन में ई20 ईंधन के कारण कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आता और न ही इंजन या अन्य पुर्जों में असामान्य घिसावट देखने को मिली है।
अपने दावे के समर्थन में सरकार ने बड़े स्तर पर जुटाए गए आंकड़ों का भी हवाला दिया। सरकार के अनुसार, एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें से लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जिन्हें मूल रूप से ई20 के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बावजूद किसी भी वाहन में ई20 के कारण जंग, असामान्य घिसावट या पुर्जों की उम्र कम होने की शिकायत सामने नहीं आई।
इसी तरह, एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी ऐसे ही परिणाम दर्ज किए हैं। वहीं, एक अन्य बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी (ओईएम) ने लंबे समय तक 1.4 करोड़ ई20 ईंधन से चलने वाले वाहनों की निगरानी की और उसमें भी एथेनॉल के कारण इंजन में जंग या किसी प्रकार की तकनीकी समस्या का कोई प्रमाण नहीं मिला।
मंत्रालय ने कहा कि एआरएआई ने भी दोहराया है कि किसी भी वाहन को ग्राहकों तक पहुंचाने से पहले उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कड़े परीक्षणों और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे उसकी सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाता है।
--आईएएनएस
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