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ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी बदलाव: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने लोइटरिंग एम्युनिशन के लिए अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत से भी इनकार किया।
 

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह क्षमताओं के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने लोइटरिंग एम्युनिशन के लिए अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत से भी इनकार किया।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि लोइटरिंग एम्युनिशन का इस्तेमाल दुश्मन के बीच भ्रम पैदा करने और कुछ लक्ष्यों को निशाना बनाने में मदद करता है। हालांकि, भारतीय वायुसेना में ड्रोन से जुड़ी क्षमताएं दशकों से मौजूद हैं।

उन्होंने कहा, “जहां तक अलग ड्रोन फोर्स की बात है, भारतीय वायुसेना में ये चीजें दशकों से मौजूद हैं। ये क्षमताएं हमारे पास दशकों से हैं। इसलिए मैं कह सकता हूं कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं हैं। हां, ये विकासवादी बदलाव जरूर हैं।”

एयर फोर्स डे से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वायुसेना में ड्रोन की संख्या, म्यूनिशन और ड्रोन तथा हथियारों के प्रकार लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, अलग ड्रोन फोर्स बनाने की जरूरत पर उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढांचे का हिस्सा बनाकर अन्य हथियार प्रणालियों के साथ मिलकर संचालित किया जाना चाहिए। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अलग-अलग हथियारों को अलग-अलग संचालित करने के बजाय उन्हें एक साथ इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि उनका प्रभाव अधिक प्रभावी हो। उन्होंने कहा, “हमने अलग फोर्स बनाने के बारे में नहीं सोचा है, बिल्कुल नहीं।” हालांकि, एयर चीफ मार्शल ने संकेत दिया कि वायुसेना में कुछ विशेष ड्रोन यूनिट मौजूद रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी यूनिट पहले से हैं और जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास 'तरंग शक्ति' के बारे में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि इस तरह के बहुराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों का उद्देश्य आपसी सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और एक-दूसरे के अनुभवों तथा काम करने के तरीकों से सीखना है।

उन्होंने कहा कि हर अभ्यास से कुछ नए अनुभव और परिणाम सामने आते हैं। इस बार नए विमान भी अभ्यास में शामिल हुए हैं। एफ-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा कुछ नए देशों ने भी अपने सैन्य विमान और अन्य संसाधनों के साथ अभ्यास में भाग लिया है, जबकि कुछ देश पहली बार पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यासों में एक साझा संचार व्यवस्था विकसित करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि विभिन्न देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ प्रभावी तरीके से संवाद कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अंग्रेजी भाषा में संवाद की बात नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और संदेश को समझने की क्षमता विकसित करने से जुड़ा है।

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तरंग शक्ति के दूसरे चरण से भारतीय वायुसेना को कई महत्वपूर्ण सबक मिलेंगे, जिनके आधार पर वह अपनी क्षमताओं में सुधार कर सकेगी। साथ ही, इसमें शामिल अन्य देश भी अभ्यास से सीख लेकर वापस जाएंगे।

'तरंग शक्ति' का आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर किया जा रहा है। इसमें 40 देशों के 2,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 80 से अधिक विमान हिस्सा ले रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी