डीआरडीओ ने 21 किमी ऊंचाई पर स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का किया सफल परीक्षण
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को स्वदेशी रूप से विकसित हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (एचएपीएस) का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस दौरान सिस्टम ने 21 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और लंबे समय तक समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में उड़ान भरने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
उम्मीद है कि यह उपलब्धि एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करेगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, प्रायोगिक उड़ान समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंची और नीचे उतरने का निर्देश मिलने से पहले लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक रही। इसके बाद प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रूप से वापस लाया गया और मिशन के दौरान इकट्ठा किए गए डेटा का विश्लेषण करके इसके प्रदर्शन का आकलन किया गया।
मंत्रालय ने बताया, "इस एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट ने समुद्र तल से 21 किलोमीटर (एएमएसएल) की ऊंचाई हासिल की और जमीन पर वापस लाने का कमांड मिलने से पहले 30 मिनट से ज्यादा समय तक 20 किलोमीटर (एएमएसएल) की ऊंचाई पर बनी रही। सिस्टम को सफलतापूर्वक रिकवर कर लिया गया और फ्लाइट परफॉर्मेंस डेटा का विश्लेषण किया गया।"
इस ट्रायल से स्ट्रैटोस्फीयर में काम करने की प्लेटफॉर्म की क्षमता का पता चला। यह इलाका लगातार निगरानी, कम्युनिकेशन और मॉनिटरिंग मिशन के लिए फायदेमंद है। फ्लाइट के दौरान हवा में मौजूद प्लेटफॉर्म से जमीनी कंट्रोल स्टेशन तक लगातार रियल-टाइम वीडियो और व्हीकल परफॉर्मेंस डेटा भेजा गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस सिस्टम में कई तरह के इंस्ट्रूमेंटेशन और कंट्रोल पैकेज लगे थे, जिनमें इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई कंट्रोल करने वाले मैकेनिज्म शामिल थे। इनके साथ कई दूसरे सब-सिस्टम भी थे, जिन्होंने पूरे मिशन के दौरान उम्मीद के मुताबिक काम किया।
यह फ्लाइट ट्रायल कई एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया, जिनमें इंडियन एयरफोर्स, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दीनेस एंड सर्टिफिकेशन (सीईएमआईएलएसी), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए), एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और दूसरे सिविल अधिकारी शामिल थे।
इस हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म को डीआरडीओ की लैब, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई), आगरा द्वारा डिजाइन और विकसित किया जा रहा है। इस प्रणाली को लंबे समय तक स्ट्रेटोस्फीयर में काम करने में सक्षम एक एरियल प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जिससे कई तरह की निगरानी और मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को एडवांस्ड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और लंबे समय तक चलने वाले स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप के विकास में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया।
--आईएएनएस
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