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घरेलू निवेशक बन रहे शेयर बाजार की ताकत, एफआईआई की बिकवाली के बीच मार्केट को रखा स्थिर : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारतीय इक्विटी मार्केट में वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बड़ी बिकवाली देखी गई है और इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को लगातार निवेश के जरिए स्थिरता प्रदान की है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
 
घरेलू निवेशक बन रहे शेयर बाजार की ताकत, एफआईआई की बिकवाली के बीच मार्केट को रखा स्थिर : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारतीय इक्विटी मार्केट में वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बड़ी बिकवाली देखी गई है और इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को लगातार निवेश के जरिए स्थिरता प्रदान की है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

वेंचुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी-मार्च 2026 में एफआईआई आक्रामक रूप से शुद्ध विक्रेता रहे, जिससे वित्तीय वर्ष में 1,31,122 करोड़ रुपए का उच्चतम तिमाही आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,44,052 करोड़ रुपए के शुद्ध इनफ्लो के साथ सबसे मजबूत तिमाही समर्थन प्रदान किया।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की बिकवाली वित्त वर्ष 26 में सालाना आधार पर 34 प्रतिशत कम होकर 2,64,819 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 25 में 4,03,581 करोड़ रुपए थी। इस दौरान डीआईआई का निवेश बढ़कर 8,43,206 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 5,71,959 करोड़ रुपए था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में भारतीय बाजारों में घरेलू स्तर पर मजबूत स्थिरता देखने को मिली, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता और जोखिम से बचने वाले विदेशी निवेशकों की भारी मात्रा में बिकवाली की भरपाई घरेलू निवेशकों की मदद से हो गई।

मई में अब तक एफआईआई द्वारा 30,374 करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई, जिससे 2026 में अब तक कुल एफआईआई बिकवाली 2,22,343 करोड़ रुपए हो गई है, जो 2025 की कुल बिकवाली 1,66,283 करोड़ रुपए से कहीं अधिक है।

एनालिस्ट ने कहा कि रुपए में स्थिरता आने और आय में सुधार होने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय बाजार में फिर से वापसी हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में लगातार बिकवाली की वजह आय ग्रोथ कमजोर होना और अन्य मार्केट में आय बेहतर होना, साथ ही अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बेहतर होना है।

इससे पहले जेफरीज की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रुपए में हाल में आई गिरावट चालू खाते घाटे और कच्चे तेल में कमजोरी से कहीं अधिक घरेलू निवेशकों द्वारा लगातार मजबूत एसआईपी निवेश से हैं, जिससे विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से निकलने का रास्ता मिला है।

--आईएएनएस

एबीएस/