चुनाव में हार के बाद डीएमके अपने संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करने की बना रही योजना
चेन्नई, 21 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा सत्र खत्म होने के बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करने जा रही है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी अपने जमीनी नेटवर्क को फिर से मजबूत करने और चुनावी मशीनरी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पुनर्गठन मुख्य रूप से चेन्नई और उसके आस-पास के जिलों पर केंद्रित होगा, जहां डीएमके को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस कवायद का मकसद पार्टी की इकाइयों के बीच तालमेल बेहतर करना, मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाना और संगठन को आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयार करना है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत चेन्नई के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री पी.के. सेकरबाबू, मा. सुब्रमण्यन और टी.एम. अंबरासन को कई विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली बड़ी संगठनात्मक इकाइयों की जिम्मेदारी दिए जाने की उम्मीद है। इस कदम का मकसद कामकाज को सुव्यवस्थित करना और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि चेन्नई का मौजूदा संगठनात्मक ढांचा राज्य के कई अन्य जिलों से अलग है। जहां चेन्नई के बाहर कई जिलों में संगठन दो विधानसभा क्षेत्रों वाली इकाइयों के आधार पर बने हैं, वहीं राजधानी शहर में कई अपेक्षाकृत छोटे संगठनात्मक जिले हैं।
प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत चेन्नई में वरिष्ठ नेताओं को चार विधानसभा क्षेत्रों वाले क्लस्टर की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे बेहतर तालमेल और मजबूत चुनाव प्रबंधन हो सके।
अभी, चेन्नई में कुछ जिला सचिव और वरिष्ठ पदाधिकारी पहले से ही पांच या छह विधानसभा क्षेत्रों की देखरेख कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व अब एक संशोधित रूपरेखा पर विचार कर रहा है, जो जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करेगी और संगठनात्मक दक्षता में सुधार लाएगी।
यह पुनर्गठन प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन द्वारा शुरू की गई व्यापक समीक्षा के बाद आया है।
पार्टी नेतृत्व द्वारा नियुक्त समितियों ने उन कारणों का पता लगाने के लिए राज्यव्यापी आकलन किया, जिनकी वजह से चुनावी हार का सामना करना पड़ा। खबरों के अनुसार, उनकी रिपोर्ट में विधानसभा क्षेत्र-स्तर की चुनौतियों, प्रचार में कमियों, संगठनात्मक कमजोरियों और मतदाताओं की बदलती सोच का विश्लेषण किया गया।
सूत्रों का कहना है कि नतीजों से बूथ और विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर मजबूत सिस्टम की जरूरत का पता चला है, खासकर शहरी इलाकों में जहां पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा।
चेन्नई डीएमके के लिए सबसे चिंताजनक इलाकों में से एक बनकर उभरा है, क्योंकि पार्टी को यहां कई बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इनमें कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में स्टालिन की हार भी शामिल है, जिसे लंबे समय से पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है।
समीक्षा समितियों की सिफारिशों के आधार पर उम्मीद है कि डीएमके नेतृत्व विधानसभा सत्र खत्म होने के तुरंत बाद पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने और भविष्य के चुनावों के लिए उसे तैयार करने के मकसद से पुनर्गठन लागू करेगा।
--आईएएनएस
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