राष्ट्रपति पुतिन के साथ व्यापार बढ़ाने और 2030 आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर चर्चा हुई: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात बेहद सार्थक रही। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने तथा भारत-रूस आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बिश्केक में हुई हमारी मुलाकात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर खुशी हुई। आज की बैठक में हमने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने, आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। साथ ही भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान वैश्विक कल्याण को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर भी विचार साझा किए।"
एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-रूस आर्थिक साझेदारी लगातार नई गति पकड़ रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ उन्होंने इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां दोनों देशों की कई कंपनियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह भारत और रूस के बीच कारोबारी साझेदारी की बढ़ती गहराई को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने 9 से 11 सितंबर तक पहली बार भारत में आयोजित रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी इनोप्रोम इंडिया का स्वागत किया और इसे व्यापार तथा औद्योगिक सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनी का दौरा किया और प्रतिभागियों से बातचीत भी की।
बैठक में दोनों नेताओं ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत बहुपक्षीय सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। इसके अलावा पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों सहित कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनका असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति है तथा भारत शांति प्रयासों में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क में बने रहने पर भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत और लचीली बनी हुई है।
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