भारी बारिश से निपटने को दिल्ली सरकार अलर्ट, एलजी-सीएम ने तैयारियों की समीक्षा की
नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में भारी बारिश से निपटने की तैयारियों और शहरी बाढ़ रोकने की योजना की समीक्षा की।
बैठक में उपराज्यपाल ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जलभराव रोकने के लिए दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक साल में दिल्ली में जलभराव वाले स्थानों की संख्या में काफी कमी आई है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2024 में जलभराव वाले 194 स्थान थे, जो 2025 में घटकर 169 रह गए। वहीं, 2026 में अब तक ऐसे केवल 34 स्थान सामने आए हैं।
बैठक में राजधानी में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के गठन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, आशीष सूद, मुख्य सचिव, विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात), अतिरिक्त मुख्य सचिव (सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण), एमसीडी आयुक्त, डीडीए के उपाध्यक्ष, मंडल आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग, गृह, परिवहन और अग्निशमन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उपराज्यपाल ने कहा कि 2024 और 2025 की तुलना में इस साल शहर में बाढ़ और जलभराव की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन अभी और सुधार की गुंजाइश है।
उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने अचानक और तेज बारिश की संभावना जताई है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि शहर में जलभराव कम से कम हो या बिल्कुल न हो।
उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली में जलभराव की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दीर्घकालिक ड्रेनेज मास्टर प्लान पर काम जारी रखते हुए अल्पकालिक उपायों को भी पूरी गंभीरता से लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अब तक हुई नालों की सफाई (डी-सिल्टिंग) के काम पर संतोष जताया, लेकिन निर्देश दिया कि निकाली गई गाद का तुरंत निस्तारण भी किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी नाला, सीवर लाइन या मैनहोल खुला नहीं छोड़ा जाए और सड़क पर बने गड्ढों को तुरंत भर दिया जाए।
बैठक में बारिश और तूफान के दौरान गिरने वाले खतरनाक पेड़ों का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर जोर दिया गया कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसे पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाया जाए।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए, ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।
--आईएएनएस
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