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दिल्ली भाजपा ने 11 संगठनात्मक जिलों के पदाधिकारियों की सूची जारी की

नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि 11 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों ने अपने-अपने जिलों के लिए पार्टी पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है।
 

नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ​​ने शनिवार को कहा कि 11 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों ने अपने-अपने जिलों के लिए पार्टी पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है।

तीन जिलों - बाहरी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और नजफगढ़ - की सूची वर्तमान जिला अध्यक्षों से परामर्श के बाद उचित समय पर घोषित की जाएगी।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि दिल्ली इकाई ने पदाधिकारियों की सूची जारी करते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व की महिला सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता के अनुरूप 33 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया है और युवाओं को भी पर्याप्त अवसर दिए हैं।

उन्होंने कहा कि हमने अनुसूचित जाति के पदाधिकारियों की नियुक्ति का भी सख्ती से पालन किया है।

उन्होंने कहा कि नई संगठनात्मक संरचना दिल्ली की जनता की सेवा में पार्टी संगठन को और अधिक ऊर्जावान बनाएगी।

इससे पहले, शुक्रवार को आपातकाल को 'संविधान हत्या दिवस' ​​के रूप में मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मल्होत्रा ​​ने कहा कि यह अवसर युवा पीढ़ी को उस अंधकारमय दौर की याद दिलाता है जब देश में लोकतंत्र का दमन किया गया था।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, विशेषाधिकार छीन लिए गए और विपक्षी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि इस दिन को याद करने का महत्व केवल आपातकाल के दौरान किए गए अन्याय पर चर्चा करने के लिए ही नहीं है, बल्कि उस दौर को न देख पाने वाली युवा पीढ़ी को उन कार्यों के पीछे की मानसिकता से अवगत कराने के लिए भी है।

उन्होंने कहा कि आपातकाल यह सिखाता है कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एक स्वतंत्र प्रेस, एक सक्रिय नागरिक समाज और जागरूक नागरिक लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।

माल्होत्रा ​​ने कहा कि सरकार चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का ही होता है।

दिल्ली भाजपा द्वारा एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में मालहोत्रा ​​की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य 1975 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लागू आपातकाल को याद करना और तत्कालीन सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कठिनाइयों का सामना करने वाले 115 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करना था।

--आईएएनएस

एमएस/