बिहार: मुजफ्फरपुर में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
पटना, 1 मई (आईएएनएस)। साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुजफ्फरपुर के साइबर पुलिस स्टेशन ने तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के जरिए पीड़ितों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
यह कार्रवाई एक वरिष्ठ नागरिक की लिखित शिकायत के बाद शुरू की गई, जिनसे धमकी और मानसिक दबाव के जरिए 17 लाख रुपए की ठगी की गई थी।
मुशहरी निवासी पीड़ित भोला प्रसाद महतो (73) ने बताया कि 5 अप्रैल, 2026 से उन्हें पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारी बनकर कई वीडियो कॉल आए।
जालसाजों ने कथित तौर पर उसे 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देकर भयभीत और मानसिक रूप से परेशान कर दिया।
दबाव में आकर पीड़ित ने 10 अप्रैल को आरटीजीएस के माध्यम से भगवानपुर स्थित फेडरल बैंक की एक शाखा में ब्रजेश कुमार के खाते में 17 लाख रुपए स्थानांतरित कर दिए।
उसे 13 अप्रैल को पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है और उसने तुरंत अपने बैंक और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) को इसकी सूचना दी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मामला संख्या 58/26 दर्ज की और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।
तकनीकी निगरानी, कॉल विवरण विश्लेषण और बैंक लेनदेन की जांच के माध्यम से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान ब्रजेश कुमार, कृष्ण कुमार और विक्रम कुमार के रूप में हुई है।
इन गिरफ्तारियों से साइबर धोखाधड़ी की नई तकनीकों पर नकेल कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड बरामद किए।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते देश भर में कई साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं से जुड़े हुए थे, जो एक व्यापक नेटवर्क का संकेत देते हैं।
पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर काम करता है और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को निशाना बना रहा है।
फरार सदस्यों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारियों के रूप में दावा करने वाले व्यक्तियों के अनचाहे फोन कॉल या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें।
--आईएएनएस
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