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शिवसेना यूबीटी ने सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी को जनता के लिए 'क्रूर दीपावली उपहार' बताया

मुंबई, 2 नवंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सीएनजी और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने इसे उन नागरिकों के लिए एक 'क्रूर दीपावली उपहार' करार दिया, जो पहले से ही सूखे और महंगाई से जूझ रहे हैं।
 

मुंबई, 2 नवंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सीएनजी और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने इसे उन नागरिकों के लिए एक 'क्रूर दीपावली उपहार' करार दिया, जो पहले से ही सूखे और महंगाई से जूझ रहे हैं।

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता को भारी आर्थिक संकट में धकेल रही है, जबकि महाराष्ट्र इस समय सूखे और बेतहाशा महंगाई से जूझ रहा है।

संपादकीय में पूरे महाराष्ट्र के आम नागरिकों और किसानों के सामने मौजूद गंभीर हालात का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है, "पूरा महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में है। किसानों के खेतों में फसल नहीं है और आम लोगों की जेब में पैसे नहीं बचे हैं। लोग अपनी थोड़ी-बहुत बचत को बचाकर रखे हुए थे, इस उम्मीद में कि दीपावली पर वे अपने बच्चों की जिंदगी में थोड़ी खुशियां ला सकेंगे। लेकिन, सरकार द्वारा सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने इन बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।"

संपादकीय में सवाल किया गया, "क्या सत्ता में बैठे लोग यह चाहते हैं कि जनता इस साल दीपावली मनाए ही नहीं?"

संपादकीय में आम आदमी पर पड़े आर्थिक बोझ का विस्तार से जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया, "मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में सीएनजी की कीमतों में 1 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जो पिछले छह महीनों में छठी बार है। वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 10 रुपए का इजाफा किया गया है।"

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों को न बदलने के सरकार के बचाव का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से बाहर खाना खाने, होटल और रेस्तरां के भोजन और दीपावली के लिए बाजार से खरीदे जाने वाले स्नैक्स और मिठाइयों की लागत सीधे तौर पर बढ़ जाती है।

उन्होंने याद दिलाया कि मई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 1,000 रुपए की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद की गई मामूली कटौती केवल एक दिखावा थी, क्योंकि कीमतें फिर से बढ़ रही हैं।

संपादकीय में वैश्विक और घरेलू कारणों से बढ़ते आर्थिक दबाव पर प्रकाश डाला गया। इसमें कहा गया, "सूखे के हालात और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण, खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। रोजमर्रा की जरूरी चीजों, दालों और अनाजों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि वे अब विलासिता की वस्तुओं जैसी लगने लगी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के फैसले से ब्याज दरें ऊपर चली गई हैं, जिससे सभी तरह के पर्सनल लोन और मॉर्गेज (होम लोन आदि) की ईएमआई महंगी हो गई है।"

राजनीतिक नेतृत्व पर निशाना साधते हुए ठाकरे गुट ने सरकार के दोहरे रवैये की आलोचना की।

उन्होंने कहा, "पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने तक अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ईंधन और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों को कृत्रिम रूप से रोककर रखा गया था। अब, 'महंगाई का घोड़ा' बेकाबू हो गया है। जो शासक खाड़ी युद्ध जैसे वैश्विक तनाव के बावजूद ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने का दावा करते थे, वे चुनाव के बाद महंगाई को लेकर पूरी तरह बेपरवाह हो गए हैं।"

--आईएएनएस

ओपी/एबीएम