कलकत्ता हाई कोर्ट आज कोलकाता नगर निगम वार्ड परिसीमन मामले में सुनाएगा फैसला
कोलकाता, 6 नवंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ (डिवीजन बेंच) शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगी। यह मामला कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में वार्डों के हालिया परिसीमन (सीमा निर्धारण) को चुनौती देने से जुड़ा है, जहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
इस मामले की सुनवाई 4 नवंबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय की उस खंडपीठ में पूरी हुई थी, जिसमें न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रॉय शामिल थे।
खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (डब्ल्यूबीएसईसी) को तब तक केएमसी चुनावों का कार्यक्रम घोषित करने से रोक दिया है, जब तक अदालत अपना आदेश नहीं सुना देती।
अब शुक्रवार को खंडपीठ इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि नए केएमसी बोर्ड के गठन के लिए इस साल के अंत तक मतदान होगा या नहीं।
पश्चिम बंगाल के सात शहरी निकायों में केएमसी और हावड़ा नगर निगम (एचएमसी) भी शामिल हैं। दिसंबर के आखिरी हफ्ते में मतदान होने की संभावना है। इसके नतीजे अगले साल जनवरी के पहले हफ्ते में घोषित किए जा सकते हैं।
इससे पहले, केएमसी में वार्डों के परिसीमन की घोषणा की गई थी, जिसके तहत वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई थी। इस बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सीपीआई(एम) नेता और पूर्व पार्षद दीपू दास द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि नए वार्ड परिसीमन पर कुछ गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं। साथ ही, नागरिकों की राय जानने के लिए इलाके में 'मौके पर जाकर जांच' करने और सार्वजनिक सुनवाई कराने का प्रस्ताव भी दिया गया था, लेकिन इन आपत्तियों और प्रस्तावों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि परिसीमन की प्रक्रिया में कई पहलुओं, जैसे कि वार्डों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति, पर ठीक से विचार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कदम किसी एक विशेष पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया था।
शुरुआत में, इस मामले की सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ (सिंगल-जज बेंच) में न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य के समक्ष हुई थी। हालांकि, इस मामले में कोई विशेष आदेश पारित करने के बजाय, जस्टिस भट्टाचार्य ने सभी संबंधित पक्षों को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सिंगल-जज बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए जस्टिस भट्टाचार्य और जस्टिस रॉय की डिवीजन बेंच का रुख किया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यदि इस मामले में कोई स्पष्ट फैसला आने से पहले ही डब्ल्यूबीएसईसी, केएमसी चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर देता है, तो उसकी याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई 4 नवंबर को पूरी हुई और डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि जब तक अदालत इस मामले में अपना फैसला नहीं सुना देती, तब तक डब्ल्यूबीएसईसी को केएमसी चुनावों का कार्यक्रम घोषित नहीं करना चाहिए।
--आईएएनएस
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