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‘हिंदी-मराठी विवाद पैदा करना सही नहीं’, ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले पर आठवले

मुंबई, 14 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए (आरपीआई-ए) के प्रमुख रामदास आठवले ने महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने के महायुति सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच विवाद पैदा करना सही नहीं है।
 

मुंबई, 14 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए (आरपीआई-ए) के प्रमुख रामदास आठवले ने महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने के महायुति सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच विवाद पैदा करना सही नहीं है।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को घोषणा की थी कि राज्यभर में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, यदि उनके पास मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आठवले ने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है। देश के हर हिस्से से लोग यहां रोजगार और रोजी-रोटी की तलाश में आते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई में बड़े उद्योगों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री भी है और देशभर के लोग यहां काम करने आते हैं। ऐसे में हिंदी और मराठी को लेकर विवाद पैदा करना बिल्कुल सही नहीं है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने आईएएनएस से कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए और भाषा का ज्ञान होना चाहिए। लेकिन उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को मराठी नहीं आने पर तत्काल कार्रवाई करना उचित नहीं है।

आठवले ने कहा, “ऑटो रिक्शा चालक एक सामान्य कामकाजी व्यक्ति है। वह एक श्रमिक है, जो ऑटो चलाकर करीब 20 हजार रुपये महीने कमाता है।”

उन्होंने मराठी भाषा सिखाने के लिए ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए कक्षाएं उपलब्ध कराने के सरनाईक के फैसले का भी उल्लेख किया। आठवले ने कहा कि कई चालक मराठी सीख रहे हैं, लेकिन भाषा नहीं आने पर उनका परमिट रद्द करना उचित नहीं है। उन्हें इसके लिए और समय दिया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र में करीब 80 प्रतिशत गैर-मराठी लोग मराठी बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज राज्य में ज्यादातर लोग मराठी समझते हैं और बड़ी संख्या में लोग इसे बोल भी सकते हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026 को लागू करने के लिए आधिकारिक शासनादेश जारी किया है।

संशोधित नियमों के तहत जिन चालकों के पास मराठी बोलने का व्यावहारिक कौशल या कामकाजी ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। यदि चालक एक महीने के भीतर मराठी सीखने में असफल रहता है तो उसके लाइसेंस का प्राधिकरण तीन महीने तक के लिए निलंबित किया जा सकता है।

निलंबन के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।

इस व्यवस्था को कानूनी रूप से लागू करने के लिए परिवहन विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को कानून एवं न्याय विभाग पहले ही मंजूरी दे चुका है।

मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया था कि यह प्रावधान किसी नए नियम पर आधारित नहीं है, बल्कि 1989 के मौजूदा नियम में पहले से मौजूद था, जिसे अधिकारियों द्वारा अतीत में सख्ती से लागू नहीं किया गया था।

--आईएएनएस

डीएससी