डीएमके-एआईएडीएमके को लेकर सीपीआई(एम) नेता की ओर से की गई टिप्पणी से सियासत गरमाई
चेन्नई, 21 जून (आईएएनएस)। डीएमके और एआईएडीएमके के 'विलय' को लेकर सीपीआई (एम) नेता पी. शनमुगम की टिप्पणी से सियासत गरमा गई है। एक इंटरव्यू में उनकी ओर से कही गई बातों की डीएमके नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।
शनमुगम ने पिछले कुछ सालों में डीएमके और एआईएडीएमके के साथ सीपीआई(एम) की ओर से किए गए गठबंधनों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले विचारधारा से समझौता करने के बजाय उस समय के राजनीतिक हालात के कारण लिए गए थे।
उन्होंने कहा, "चुनावी गठबंधन राजनीतिक हकीकत के आधार पर बनते हैं। सीटों के बंटवारे से दोनों पक्षों को फायदा होता है और ऐसे राजनीतिक फैसलों में 'धोखा' शब्द की कोई जगह नहीं है।"
पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि डीएमके ने खुद भी अहम मौकों पर डीएमडीके जैसी छोटी पार्टियों का सहारा लिया था, क्योंकि उसके पास अकेले जीत हासिल करने की ताकत नहीं थी।
शनमुगम के अनुसार, तमिलनाडु में राजनीतिक बदलावों और लोगों की उम्मीदों ने मार्क्सवादी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक रुख को प्रभावित किया है। उन्होंने डीएमके नेतृत्व की भी आलोचना की कि वे उन पार्टियों पर हमले होने देते हैं जो उनका गठबंधन छोड़ देती हैं। उन्होंने कहा, "गठबंधन छोड़ने वालों को निशाना बनाने की आदत गलत है। डीएमके नेतृत्व को उन लोगों को रोकना चाहिए जो भावुक और दुश्मनी भरी बातें करते हैं।"
शनमुगम ने तर्क दिया कि दोनों द्रविड़ पार्टियां धीरे-धीरे अपने कई मूल सिद्धांतों से दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा, "आज के राजनीतिक माहौल में अगर डीएमके और एआईएडीएमके आखिरकार एक पार्टी के तौर पर काम करने लगें, तो हैरानी की बात नहीं होगी।"
बता दें कि शनमुगम की ओर से ये बातें हालिया विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुई राजनीतिक चर्चाओं के बीच आई हैं। उस समय ऐसी खबरें आई थीं कि डीएमके और एआईएडीएमके के मिलकर सरकार बनाने की संभावना पर शुरुआती बातचीत हुई थी।
हालांकि, डीएमके नेताओं ने उनकी बातों की कड़ी निंदा की है और दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों के बीच भविष्य में विलय के किसी भी सुझाव को खारिज कर दिया है।
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