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सीपीआई ने तमिलनाडु सरकार से तटीय सचिवालय योजना रद्द करने का आग्रह किया

चेन्नई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पत्तिनापक्कम में प्रस्तावित तमिलनाडु सचिवालय के विरोध में रविवार को सीपीआई द्वारा हस्ताक्षर अभियान शुरू करने के बाद और जोर पकड़ा गया। सीपीआई ने मछुआरों की आजीविका और तटीय पर्यावरण को लेकर चिंताओं के मद्देनजर परियोजना को रद्द करने के लिए सरकारी आदेश की मांग की है।
 

चेन्नई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। पत्तिनापक्कम में प्रस्तावित तमिलनाडु सचिवालय के विरोध में रविवार को सीपीआई द्वारा हस्ताक्षर अभियान शुरू करने के बाद और जोर पकड़ा गया। सीपीआई ने मछुआरों की आजीविका और तटीय पर्यावरण को लेकर चिंताओं के मद्देनजर परियोजना को रद्द करने के लिए सरकारी आदेश की मांग की है।

टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली इस पार्टी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से प्रशासनिक परिसर के लिए एक वैकल्पिक स्थान चुनने और तटीय भूमि पर मछुआरे समुदाय के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया।

सीपीआई राज्य समिति की ओर से इस पहल की शुरुआत करते हुए राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि पार्टी और अन्य वामपंथी और लोकतांत्रिक ताकतों ने मरीना बीच के पास सचिवालय स्थापित करने के प्रस्ताव का बार-बार विरोध किया है।

जिला सचिव शिवा और निर्वाचन क्षेत्र सचिव मैरी दिव्या के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान में फोरशोर एस्टेट योजना को रद्द करने के लिए जन समर्थन मांगा जा रहा है।

वीरपांडियन ने कहा कि विकास में तटीय समुदायों और उनके परिवेश के बीच संबंधों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मछुआरे समुद्र के साथ घनिष्ठ सामंजस्य में रहते और काम करते हैं, और इस बात पर जोर दिया कि तट से उनका दीर्घकालिक संबंध क्षेत्र में भूमि के उपयोग पर निर्णय लेते समय मार्गदर्शक होना चाहिए।

पहाड़ियों में रहने वाले समुदायों से तुलना करते हुए वीरपांडियन ने तर्क दिया कि मछुआरों को उनके पैतृक परिवेश से हटाना उनकी आजीविका को नुकसान पहुंचाएगा और तटीय क्षेत्र के स्वरूप को भी क्षति पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि तट से उनका जुड़ाव उनके दैनिक जीवन और काम से अविभाज्य है।

सीपीआई नेता ने समुद्र तट पर सरकारी परिसर के निर्माण के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने समुद्री हवा को बाधित करने वाले निर्माण को 'प्रकृति पर हमला' बताया और कहा कि समुद्र तट खुले सार्वजनिक स्थान बने रहने चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाई जा रही पर्यावरणीय चिंताओं के विपरीत होगा।

उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार को निवासियों पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ-साथ पारिस्थितिक परिणामों पर भी विचार करना चाहिए।

उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की अनुपलब्धता के सुझाव को खारिज करते हुए वीरपांडियन ने रेसकोर्स की भूमि की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि वहां 120 एकड़ भूमि उपलब्ध है और सरकार से प्रस्तावित परिसर के लिए मौजूदा स्थानों का मूल्यांकन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य को तटीय स्थान को अपरिहार्य मानने के बजाय, लोगों के विस्थापन से बचने के लिए एक वैकल्पिक समाधान तलाशना चाहिए।

प्रस्ताव को रद्द करने के लिए सरकारी आदेश की मांग करके, सीपीआई परियोजना पर निर्णय के लिए दबाव बना रही है। हस्ताक्षर अभियान तटीय आजीविका, पर्यावरण और सार्वजनिक स्थान के उपयोग पर पार्टी की आपत्तियों को एक साथ लाता है, साथ ही एक वैकल्पिक स्थल की अपनी मांग को दोहराता है।

--आईएएनएस

एनएस/