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पुलिस उपाधीक्षक भर्ती को लेकर केरल पीएससी की फिर से जांच-पड़ताल

तिरुवनंतपुरम, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पहले से ही राज्य योजना बोर्ड में एक उच्च पद पर भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दायरे में है। अब आयोग को एक और नई शिकायत का सामना करना पड़ रहा है, जो इस बार पुलिस उपाधीक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी है।
 

तिरुवनंतपुरम, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पहले से ही राज्य योजना बोर्ड में एक उच्च पद पर भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दायरे में है। अब आयोग को एक और नई शिकायत का सामना करना पड़ रहा है, जो इस बार पुलिस उपाधीक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी है।

हाल ही में दर्ज कराई गई एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पीएससी ने पुलिस उपाधीक्षक के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया बहुत तेजी से पूरी की, जिससे उम्मीदवारों के चयन और नियुक्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसकी लिखित परीक्षा पिछले साल दिसंबर में हुई थी, मई के पहले हफ्ते में रैंक लिस्ट जारी की गई और जून में नियुक्ति आदेश दे दिए गए।

यह शिकायत 'सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार ने दर्ज कराई है, जिन्होंने इस चयन प्रक्रिया की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिस उम्मीदवार को पहली रैंक मिली है, वह एसएफआई का नेता है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। शशिकुमार ने इस मामले को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के सामने उठाया है।

हालांकि, उस उम्मीदवार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि वह पीएससी की अन्य परीक्षाओं की रैंक लिस्ट में भी शामिल है। उसने आरोप लगाया है कि यह शिकायत उसकी नियुक्ति को रोकने के इरादे से की गई है।

यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पीएससी परीक्षाओं और भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बड़ी जांच का सामना कर रहा है। मई में सत्ता में आने के तुरंत बाद सतीशन सरकार ने क्राइम ब्रांच की विशेष जांच दल का गठन किया था, जो राज्य योजना बोर्ड में एक वरिष्ठ पद पर हुई भर्ती से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।

इस जांच के तहत पीएससी के अध्यक्ष डॉ. एमआर बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पूछताछ की जा चुकी है। बाकी 12 सदस्यों से सोमवार से पूछताछ की जानी है।

पीएससी के सचिव साजू जॉर्ज भी सोमवार को लगातार दूसरे दिन एसआईटी के सामने पेश होंगे। वर्तमान पीएससी के सभी 16 सदस्य पिछली पिनाराई विजयन सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए गए थे, जो इस साल मई में खत्म हुआ।

आयोग के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ और नई शिकायतों के सामने आने से, इसकी भर्ती प्रक्रियाओं पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

सरकार का कहना है कि जांच से यह साफ हो जाएगा कि क्या भर्ती प्रक्रिया में जानबूझकर हेरफेर करने और राज्य की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी।

--आईएएनएस

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