पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का भाजपा नेताओं पर आरोप, दोषसिद्धि को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया
भोपाल, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के अयोग्य घोषित पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने सोमवार को अपनी दोषसिद्धि को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और मंत्री विश्वास सारंग पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया।
भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में अदालत के फैसले के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए भारती ने कहा, “यह पूरा मामला पहले से तय और राजनीतिक रूप से प्रेरित था। मुझे साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की गई।”
उन्होंने आरोप लगाया कि नरोत्तम मिश्रा ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया। भारती ने कहा, “अभियोजन पक्ष को गुमराह किया गया और बैंक के वकील के साथ मिलीभगत कर केस को इस तरह मोड़ा गया कि मुझे दोषी ठहराया जा सके।”
हालांकि, उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा, “मुझे अदालत पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा।”
राजेंद्र भारती ने मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मंदिर निर्माण के जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद किया गया है। वे न लोगों को छोड़ते हैं और न ही भगवान को।” उन्होंने यह टिप्पणी दतिया जिले में बने ‘नवग्रह शक्ति पीठ’ मंदिर को लेकर की।
पूर्व विधायक ने खेल मंत्री विश्वास सारंग पर उनकी मां के खिलाफ झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
भारती ने अपनी दोषसिद्धि और तीन साल की सजा को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 15 अप्रैल को सुनवाई होगी। 7 अप्रैल की पिछली सुनवाई में अदालत ने अभियोजन पक्ष, मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था।
अपनी याचिका में भारती ने दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग से दतिया विधानसभा सीट पर चुनाव तिथि घोषित न करने का निर्देश देने की भी अपील की है। हालांकि, अदालत ने अब तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है।
गौरतलब है कि 1 अप्रैल को नई दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में भारती को दोषी ठहराया था। उन पर 1998 से 2011 के बीच फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध ब्याज भुगतान हासिल करने का आरोप है। अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, हालांकि अपील के लिए 60 दिन की जमानत भी दी गई।
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