फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चुनाव आयोग कार्रवाई करे: डीके शिवकुमार
बेंगलुरु, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को आरोप लगाया कि भाजपा और जनता दल (एस) के नेता एवं कार्यकर्ता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से करीब 50 लाख पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की आपराधिक साजिश में शामिल हैं।
उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करे, जो पहले से भरे हुए फॉर्म-7 आवेदनों का इस्तेमाल करके अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
सीएम शिवकुमार ने दावा किया कि कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अब तक 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जा चुके हैं और 45 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बावजूद उन्होंने आरोप लगाया कि अब करीब 50 लाख और मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
अपने सरकारी आवास कृष्णा में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा और जनता दल (एस) के कार्यकर्ताओं ने कई विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को ऐसे फॉर्म-7 आवेदन सौंपे हैं, जिनमें मतदाताओं का विवरण पहले से भरा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मकसद मतदाताओं के नाम सूची से हटवाना था।
उन्होंने कहा, "यह एक आपराधिक साजिश है और सांप्रदायिक नफरत पैदा करने तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सुनियोजित कोशिश है।"
सीएम ने दावा किया कि बाबलेश्वर में ऐसे 1,600 से अधिक आवेदन जमा किए गए, जबकि विजयपुरा में 14,000 और भालकी में 3,244 आवेदन दिए गए। उन्होंने कहा कि भालकी, नरसिम्हराजपुरा, बेलगावी और कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इस तरह की कोशिशों का पता चला है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कुछ विधानसभा क्षेत्रों में 5,000 से 10,000 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश भी की गई। उन्होंने कहा कि अभिनेता प्रकाश राज के नेतृत्व वाले एक नागरिक समूह के सदस्यों ने मतदान केंद्रों का दौरा कर इस संबंध में जानकारी जुटाई है।
सीएम शिवकुमार ने कहा, "भाजपा के आधिकारिक कार्यकर्ताओं ने अपने नाम से ऐसे सैकड़ों फॉर्म-7 आवेदन जमा किए हैं। कुछ जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी गलती स्वीकार भी की है।"
उन्होंने सवाल किया कि मतदाताओं की जानकारी पहले से भरे हुए ये फॉर्म आखिर कहां छापे जा रहे हैं और इस अभियान के पीछे कौन है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने राज्य चुनाव आयोग से तुरंत एफआईआर दर्ज करने, मामले की व्यापक जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार राज्य के प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस साजिश को लेकर मामले दर्ज करेगी और इसकी जांच करेगी।"
सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि वह मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय जाएंगे और तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई होने तक मंत्री आयोग के कार्यालय में धरने पर बैठेंगे।
भाजपा और जनता दल (एस) पर निशाना साधते हुए शिवकुमार ने आरोप लगाया कि दोनों दल चुनाव नहीं जीत पाने के कारण इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की अपनी मांग भी दोहराई और इसे बड़ा फर्जीवाड़ा बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जानकारी के बिना इस तरह की गतिविधियां कैसे हो सकती हैं।
सीएम शिवकुमार ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से राज्य सरकार ने चुनाव आयोग को पूरा सहयोग दिया है और 54,000 बीएलए-2 प्रतिनिधियों को नियुक्त किया है।
उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान के अधिकार की रक्षा करने, गतिविधि में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने और बीएलओ पर दबाव बनाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की।
--आईएएनएस
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