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‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ डॉक्यूमेंट्री विवाद: कांग्रेस सांसद ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजा

मुंबई, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। लुधियाना लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजा है।
 
‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ डॉक्यूमेंट्री विवाद: कांग्रेस सांसद ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजा

मुंबई, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। लुधियाना लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजा है।

मंगलवार को, सांसद ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत भारत द्वारा अधिनियमित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के उल्लंघन का हवाला देते हुए सीरीज के प्रसारण को रोकने अनुरोध किया।

उन्होंने लिखा कि यह वेब सीरीज कथित तौर पर संगठित आपराधिक नेटवर्क में शामिल कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और गतिविधियों पर आधारित है, जिसके खिलाफ सक्षम अदालतों में कई गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। इसलिए, यह वेब सीरीज एक अपराधी और गैंगस्टर का महिमामंडन करेगी, जो गैरकानूनी गतिविधि को सीधे तौर पर बढ़ावा देने के बराबर है। एक जाने-माने अपराधी के जीवन को नाटकीय रूप देने से आपराधिक आचरण को महिमामंडित और वैध ठहराने का वास्तविक खतरा है, जिससे अनुचित बदनामी और सामाजिक मान्यता मिलेगी, अपराध के इर्द-गिर्द विकृत प्रोत्साहन और आकांक्षात्मक मूल्य पैदा होगा और आपराधिक कानून के निवारक प्रभाव को कमजोर करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब राज्य वर्तमान में संगठित गिरोहों और युवाओं के आपराधिक प्रभाव में आने की आशंका से जूझ रहा है। ऐसे संवेदनशील माहौल में, किसी वास्तविक गैंगस्टर का प्रमुख कथात्मक चित्रण अनुकरण और नायक-पूजा को बढ़ावा दे सकता है। इस तरह की सामग्री से कानून-व्यवस्था की चिंताएं बढ़ने की प्रबल संभावना है, और नकल की घटनाओं और गिरोहों के बीच उकसावे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वास्तव में, यह स्थापित कानून है कि जहां अभिव्यक्ति और सार्वजनिक अव्यवस्था के बीच उचित संबंध हो, वहां निवारक कार्रवाई उचित है।

उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (2) का हवाला देते हुए कहा कि यद्यपि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, फिर भी यह पूर्ण नहीं हो सकती और अभिव्यक्ति की प्रकृति और विषयवस्तु के आधार पर इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी सामग्री जो आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने या उसे वैध ठहराने की प्रवृत्ति रखती है, विशेषकर अस्थिर सामाजिक परिवेश में, वह स्पष्ट रूप से अनुमेय प्रतिबंध के दायरे में आती है।

--आईएएनएस

एमएस/