Aapka Rajasthan

हरियाणा में बिजली संकट पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, निजी कंपनी को दिया गया टेंडर रद्द करने की मांग

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को हरियाणा में जारी बिजली संकट को लेकर राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बिजली वितरण व्यवस्था को निजी कंपनी के हवाले करने के लिए दिए गए किसी भी टेंडर को रद्द करने की मांग की।
 

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को हरियाणा में जारी बिजली संकट को लेकर राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बिजली वितरण व्यवस्था को निजी कंपनी के हवाले करने के लिए दिए गए किसी भी टेंडर को रद्द करने की मांग की।

सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के रुख पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार अज्ञात लाभ के लिए बिजली वितरण व्यवस्था एक निजी कंपनी को सौंपने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि हरियाणा बिजली और पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। इससे आम लोगों के घरों, कारोबार और उद्योगों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "बिजली और पानी के संकट के कारण हरियाणा के लोग बहुत परेशान हैं। लोगों के इन्वर्टर जवाब दे रहे हैं। कारोबार और उद्योग बर्बादी की कगार पर हैं। पानी और दूध जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी से परेशान लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।"

बिजली वितरण व्यवस्था के कथित निजीकरण पर सवाल उठाते हुए सुरजेवाला ने पूछा कि राज्य सरकार इसे एक ही निजी कंपनी को क्यों सौंपना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार अज्ञात लाभ के लिए बिजली वितरण व्यवस्था एक कंपनी को सौंपना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि इस कदम के पीछे क्या वजह है और सरकार निजी कंपनी को यह व्यवस्था क्यों देना चाहती है।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मुनाफे की अधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर कई बैठकें कर चुके हैं, जबकि सरकार लगातार स्थिति सुधारने के प्रयास करने का दावा कर रही है।

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य सरकार नियामक प्राधिकरणों के फैसलों से अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।

उन्होंने कहा, "हरियाणा के निवासी के तौर पर मैं पूछना चाहता हूं कि क्या एचईआरसी ने बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने का आदेश दिया है? सभी नियुक्तियां आपने की हैं और आयोग के सदस्य भी भाजपा से जुड़े हैं। सरकार आपकी है, नियुक्तियां आप करते हैं और आयोग भी आपके हैं। आपने ही बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंपने के आदेश जारी किए हैं।"

सुरजेवाला ने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि वह बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार इस कदम का विरोध करती है, तो उसने अब तक हस्तक्षेप क्यों नहीं किया और कंपनियों को व्यवस्था अपने हाथ में लेने से रोकने के लिए चेतावनी क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा, "नायब सैनी जी, आप किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं? हरियाणा की भाजपा सरकार किसे गुमराह कर रही है? यदि राज्य के घरों में अंधेरा छाता है, हजारों लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं या बिजली वितरण व्यवस्था को भारी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नायब सैनी और उनकी सरकार की होगी।"

कांग्रेस नेता ने बिजली अधिनियम की धारा 108 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास इस मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार है। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। सुरजेवाला ने कहा कि यदि सरकार को हरियाणा के लोगों की चिंता है, तो उसे बिजली कर्मचारी यूनियनों को बुलाकर निजी कंपनी को दिया गया टेंडर रद्द कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो उसके इरादों पर और सवाल उठेंगे। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में शामिल लोगों को इसके परिणामों की जिम्मेदारी लेनी होगी।

--आईएएनएस

डीएससी