कांग्रेस ने गुजरात सरकार से पूछा- पीएम फसल बीमा योजना क्यों नहीं लागू की?
अहमदाबाद/नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। गुजरात कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य सरकार से सवाल किया कि केंद्र सरकार के बार-बार अनुरोध के बावजूद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को गुजरात में क्यों लागू नहीं किया गया। पार्टी ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए इस योजना को तुरंत लागू करने की मांग की।
अहमदाबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उन्हें लिखे गए पत्रों की प्रतियां जारी कीं।
गोहिल ने दावा किया कि इन पत्रों से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से फसल बीमा योजना लागू करने का आग्रह किया था, लेकिन गुजरात अब तक इस योजना से बाहर है।
उन्होंने कहा, "केंद्रीय कृषि मंत्री ने 25 नवंबर 2025 को गुजरात के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि देश के लगभग सभी राज्य प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर रहे हैं और इस योजना ने बेमौसम बारिश, अत्यधिक वर्षा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों को बड़ी सहायता प्रदान की है।"
गोहिल ने कहा कि पत्र में राज्य सरकार से इस योजना को तुरंत लागू करने का आग्रह किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष 5 दिसंबर को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान गुजरात में बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें लिखित जवाब दिया था।
गोहिल के अनुसार, केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि देशभर के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन गुजरात सरकार ने केंद्र के बार-बार अनुरोध के बावजूद इस योजना को लागू नहीं किया है, इसलिए केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से गुजरात के किसानों को मुआवजा नहीं दे सकती।
उन्होंने कहा, "पूरा देश फसल बीमा योजना का लाभ ले रहा है, लेकिन गुजरात सरकार ने बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे स्वीकार नहीं किया।" गोहिल ने दावा किया कि गुजरात देश का एकमात्र राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपने पत्र में पीएमएफबीवाई को किसानों के लिए लाभकारी योजना बताया है, जो बुआई से लेकर फसल कटाई तक होने वाले नुकसान पर मुआवजा प्रदान करती है।
गोहिल के अनुसार, मंत्री ने यह भी कहा था कि योजना सभी फसलों को कवर करती है और सब्जियों तथा पेड़ों को हुए नुकसान पर भी सहायता उपलब्ध कराती है।
गोहिल ने दावा किया कि पिछले वर्ष बेमौसम भारी बारिश के कारण किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था।
उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार ने पीएमएफबीवाई लागू की होती तो किसानों को पूरा मुआवजा मिल सकता था। इसके बजाय राज्य सरकार ने केवल कुछ सीमित क्षेत्रों के किसानों को सीमित मुआवजा दिया, जो बीज और खेती की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं था।"
कांग्रेस ने मांग की कि राज्य सरकार यह स्पष्ट करे कि केंद्र सरकार के अनुरोध के बावजूद उसने किसानों को इस केंद्रीय फसल बीमा योजना से बाहर क्यों रखा और इसके लिए किसानों से माफी मांगे।
पार्टी ने यह भी मांग की कि पिछले वर्ष किसानों को हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए, न कि केवल सीमित सहायता।
मानसून में देरी और एल नीनो के कारण फसल नुकसान की आशंका का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने गुजरात सरकार से बिना देरी किए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की मांग की।
पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि 2019-20 से गुजरात के किसान इस योजना से बाहर क्यों हैं, जबकि अन्य राज्यों के किसान इसका लाभ उठा रहे हैं।
बता दें कि गुजरात सरकार ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बाहर निकलते हुए इसके विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना शुरू की थी।
राज्य सरकार का कहना था कि बीमा कंपनियों द्वारा पीएमएफबीवाई के तहत अधिक प्रीमियम दरें मांगे जाने के कारण यह फैसला लिया गया था।
केंद्र की योजना के विपरीत, मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान होने पर बिना किसी बीमा प्रीमियम के वित्तीय सहायता दी जाती है। राज्य सरकार यह भी कहती रही है कि आपदा से जुड़े राहत कार्य राज्य आपदा मोचन कोष के माध्यम से किए जाते हैं।
--आईएएनएस
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