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कोल इंडिया का बड़ा निवेश; 3,300 करोड़ रुपए के निवेश से लगाएगी 8 नई कोकिंग कोल वाशरी

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। कोल इंडिया ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह करीब 3,300 करोड़ रुपए का निवेश करके 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। यह कदम कोयले की गुणवत्ता सुधारने और स्टील उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
 
कोल इंडिया का बड़ा निवेश; 3,300 करोड़ रुपए के निवेश से लगाएगी 8 नई कोकिंग कोल वाशरी

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। कोल इंडिया ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह करीब 3,300 करोड़ रुपए का निवेश करके 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। यह कदम कोयले की गुणवत्ता सुधारने और स्टील उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।

नई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीवाई) होगी और इन्हें 2029-30 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में कोल इंडिया के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिनकी कुल क्षमता 18.35 एमटीवाई है, यानी अगले चार वर्षों में यह विस्तार क्षमता को दोगुने से भी अधिक कर देगा।

बता दें कि कोकिंग कोल वाशरी एक संयंत्र है जो कच्चे कोकिंग कोल से अशुद्धियों (जैसे राख, पत्थर, मिट्टी) को हटाकर उसकी गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे स्टील उद्योग में उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाला कोयला तैयार होता है।

कंपनी अपनी मौजूदा कोकिंग कोल वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण के लिए भी करीब 300 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बना रही है, ताकि उनकी कार्यक्षमता और उपयोगिता बेहतर हो सके।

नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से 5, जिनकी कुल क्षमता 14.5 एमटीवाई होगी, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के तहत स्थापित की जाएंगी, जबकि 3 वॉशरियां 7 एमटीवाई क्षमता के साथ भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के अंतर्गत विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा कंपनी राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपने पुराने परिसंपत्तियों का भी मुद्रीकरण कर रही है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की एक वॉशरी का मुद्रीकरण करने के बाद अब तीन और बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने की योजना है।

कंपनी दो पुरानी वॉशरियों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण पर भी काम कर रही है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता, रिकवरी दक्षता और प्रोसेस की विश्वसनीयता में सुधार हो सके।

कोल इंडिया निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी टाटा स्टील के साथ भी सहयोग कर रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग करके घरेलू स्टील सेक्टर को उच्च गुणवत्ता वाला कोकिंग कोल उपलब्ध कराया जा सके।

कोकिंग कोल स्टील उत्पादन के लिए एक अहम कच्चा माल है, लेकिन भारत में उपलब्ध कोयले में राख की मात्रा 25 से 45 प्रतिशत तक होती है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है। यही कारण है कि देश को महंगे आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भी दबाव पड़ता है।

कोल इंडिया ने कहा कि इन सभी पहलों से आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश के औद्योगिक क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।

--आईएएनएस

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