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कोयला गैसीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे अहम सेक्टर्स में तेजी से विस्तार कर रही कोल इंडिया

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) पारंपरिक कोयला खनन कंपनी से धीरे-धीरे एक विविधीकृत ऊर्जा, खनिज, सामग्री और प्रौद्योगिकी-केंद्रित संगठन के रूप में विकसित हो रही है। कोयला गैसीकरण, कुशल बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा एवं बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस), महत्वपूर्ण खनिजों, उन्नत सामग्रियों और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) से जुड़ी उसकी पहल इस बदलाव के लिए व्यापक आधार तैयार कर रही हैं। यह जानकारी कंपनी की ओर से रविवार को दी गई।
 

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) पारंपरिक कोयला खनन कंपनी से धीरे-धीरे एक विविधीकृत ऊर्जा, खनिज, सामग्री और प्रौद्योगिकी-केंद्रित संगठन के रूप में विकसित हो रही है। कोयला गैसीकरण, कुशल बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा एवं बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस), महत्वपूर्ण खनिजों, उन्नत सामग्रियों और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) से जुड़ी उसकी पहल इस बदलाव के लिए व्यापक आधार तैयार कर रही हैं। यह जानकारी कंपनी की ओर से रविवार को दी गई।

बयान में कहा गया कि कंपनी का बिजनेस डेवलपमेंट पोर्टफोलियो पांच परस्पर मजबूत करने वाले क्षेत्रों के आसपास संगठित है। इनमें कोयला गैसीकरण और कोयले से रसायन, थर्मल पावर, नवीकरणीय ऊर्जा एवं स्टोरेज, महत्वपूर्ण खनिज एवं उन्नत सामग्री तथा लौह अयस्क सहित विविधीकृत खनिज शामिल हैं।

इस पोर्टफोलियो में पहले से ही राष्ट्रीय स्तर की कई परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें चार कोयले से रसायन बनाने वाली पहलों में करीब 69,346 करोड़ रुपए का निवेश, 2×800 मेगावाट चंद्रपुरा अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल विस्तार, लगभग 550 मेगावाट की चालू सौर क्षमता, ग्रिड-स्तरीय बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) परियोजनाएं तथा महत्वपूर्ण खनिजों और डाउनस्ट्रीम सामग्रियों से जुड़े अवसर शामिल हैं।

कोयला गैसीकरण में कोयले को सिंथेसिस गैस या सिनगैस में बदला जाता है। इसका इस्तेमाल सिंथेटिक नेचुरल गैस (एसएनजी), अमोनिया, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल और अन्य रसायनों के उत्पादन में किया जा सकता है। यह तकनीक कोयले से रासायनिक मूल्य हासिल करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।

सीआईएल की कोयले से रसायन बनाने वाली चार प्रमुख पहलों में तलचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड, कोल गैस इंडिया लिमिटेड और सीआईएल-बीपीसीएल चंद्रपुरा कोल-टू-एसएनजी पहल शामिल हैं।

इन पहलों में तकनीकी प्राथमिकताओं में उच्च-राख वाले भारतीय कोयले के अनुरूप प्रक्रियाओं को ढालना, प्रक्रिया का अनुकूलन, महत्वपूर्ण उपकरणों का स्थानीयकरण, उन्नत प्रक्रिया नियंत्रण एवं डिजिटल ट्विन, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव तथा पानी, राख और उत्सर्जन प्रबंधन में सुधार शामिल हैं। परियोजनाओं को दोहराने का फैसला परिचालन संबंधी आंकड़ों और वाणिज्यिक प्रदर्शन के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।

अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (यूसीजी) गहराई में मौजूद या अन्यथा खनन योग्य नहीं होने वाले कोयले को सिनगैस में बदलने का संभावित तरीका है। चूंकि यह तकनीक अभी तक वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक रूप से साबित नहीं हुई है, इसलिए सीआईएल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के कस्ता वेस्ट ब्लॉक में चरणबद्ध पायलट परियोजना पर काम कर रही है।

सीआईएल और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) झारखंड के चंद्रपुरा में 2×800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना लागू कर रहे हैं। इसके लिए प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में दोनों की हिस्सेदारी 50:50 होगी। डीवीसी बिजली की बिक्री में मदद करेगा। भविष्य में उच्च दक्षता वाले बिजली उत्पादन, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव, संयंत्र के लचीले संचालन, उत्सर्जन नियंत्रण, पानी के पुनर्चक्रण और राख के वैज्ञानिक उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा।

बयान के अनुसार, सीआईएल करीब 550 मेगावाट सौर क्षमता चालू कर चुकी है, जबकि रूफटॉप, ग्राउंड-माउंटेड, कैप्टिव, अंतरराज्यीय और बाजार से जुड़े सौर प्रोजेक्ट विकास के चरण में हैं। सीआईएल दो मॉडल पर काम कर रही है जिसमें बिजली की लागत और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए कैप्टिव सौर परियोजनाएं तथा व्यावसायिक स्तर पर नवीकरणीय बिजली उत्पादन के लिए यूटिलिटी-स्केल परियोजनाएं शामिल हैं।

सीआईएल गोरखपुर के चिलवा ताल में 20 मेगावाट एसी ग्रिड-कनेक्टेड फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट भी विकसित कर रही है। उपयुक्त जल निकायों के लिए फ्लोटिंग सोलर जमीन की कम जरूरत वाला विकल्प उपलब्ध कराता है।

सीआईएल के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) नवीकरणीय ऊर्जा के ग्रिड में एकीकरण, पीक डिमांड मैनेजमेंट, ग्रिड में लचीलापन और ट्रांसमिशन क्षमता के बेहतर इस्तेमाल में मदद करते हैं। सीआईएल की पहलों में तेलंगाना की टीजीजीईएनसीओ चौटुप्पल परियोजना शामिल है। कंपनी ओडिशा में भी चार स्थानों पर 80 मेगावाट/320 मेगावाट-घंटा क्षमता वाला बीईएसएस पोर्टफोलियो विकसित कर रही है, जिसमें चार घंटे की स्टोरेज अवधि होगी।

सीआईएल महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े अवसरों पर भी काम कर रही है। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण, एयरोस्पेस और रक्षा के लिए आवश्यक हैं। बयान के अनुसार, भारत में सीआईएल के अवसरों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट संपत्तियां तथा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई) और दुर्लभ धातुओं से जुड़े अवसर शामिल हैं।

--आईएएनएस

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