कर्नाटक: कंपनियों को भर्ती में कन्नड़ युवाओं को देनी चाहिए प्राथमिकता: सीएम डीके शिवकुमार
बेंगलुरु, 5 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में आईटी कंपनियों में कन्नड़ भाषी कर्मचारियों की संख्या को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को बेंगलुरु में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों से स्थानीय युवाओं को अधिक रोजगार देने और भर्ती में कन्नड़िगाओं को प्राथमिकता देने की अपील की।
बेंगलुरु में एक निजी बहुराष्ट्रीय स्टोर के उद्घाटन के बाद बोलते हुए सीएम शिवकुमार ने स्वीडन की फर्नीचर कंपनी से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और कन्नड़ युवाओं को अधिक रोजगार अवसर देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "कर्नाटक के छोटे उद्योग अच्छी गुणवत्ता वाला फर्नीचर तैयार कर सकते हैं। उनका उपयोग करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। इसके जरिए कर्नाटक को प्राथमिकता दें और संगठन में अधिक कन्नड़िगाओं को रोजगार दें।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने आज तक किसी स्टोर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं लिया। मैं आम तौर पर अपने बच्चों द्वारा शुरू की गई इमारतों के उद्घाटन में भी नहीं जाता। यह पहली बार है जब मैं किसी स्टोर के उद्घाटन में आया हूं।"
उन्होंने कहा, "हम वैश्विक निवेशकों को कर्नाटक आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं और यहां कई अवसर पैदा किए हैं। यह कंपनी बेंगलुरु के दक्षिणी हिस्से में है, इसलिए उसे कर्नाटक को अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वीडन के भारत और कर्नाटक के साथ अच्छे संबंध हैं। स्थानीय कन्नड़ युवाओं को अधिक रोजगार दें। हमारे युवा प्रतिभाशाली, संस्कारी हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।"
मुख्यमंत्री की यह अपील ऐसे समय आई है जब कर्नाटक रक्षणा वेदिके (केआरवी) ने आईटी कंपनियों में मूल निवासी या कन्नड़ भाषा बोलने वाले लोगों को मिलने वाले रोजगार के मुद्दे पर एक महीने लंबा अभियान शुरू किया हुआ है।
राज्य अध्यक्ष टीए नारायण गौड़ा के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान के तहत संगठन बेंगलुरु की 100 से अधिक आईटी कंपनियों और टेक्नोलॉजी पार्कों का दौरा कर रहा है और कन्नड़िगा कर्मचारियों की संख्या से जुड़ी जानकारी मांग रहा है।
यह अभियान 1 नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर शुरू किया गया था। इसकी पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर सामने आए वे वीडियो और आरोप हैं, जिनमें कहा गया कि निजी कंपनियों में भर्ती के दौरान कन्नड़ भाषी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
अभियान के तहत केआरवी के कार्यकर्ता विभिन्न कंपनियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं और कुल कर्मचारियों की संख्या, कन्नड़िगा कर्मचारियों का प्रतिशत, भर्ती मानदंड, पिछले तीन वर्षों की भर्ती प्रवृत्ति तथा स्थानीय इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मांग रहे हैं।
संगठन का दावा है कि उसके कार्यकर्ता अब तक करीब 300 आईटी-बीटी कंपनियों का दौरा कर रोजगार संबंधी आंकड़े जुटा चुके हैं। यह जानकारी दिसंबर में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सौंपी जाएगी।
अभियान की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए नारायण गौड़ा ने पूर्व उद्योग जगत के नेता मोहनदास पई पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति इस आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। मोहनदास पई कन्नड़िगाओं को उकसा रहे हैं और उनका मजाक उड़ा रहे हैं। वह शकुनि जैसे लगते हैं। यदि कोई इस आंदोलन को रोकने की कोशिश करेगा तो उसे वेदिके के विरोध का सामना करना पड़ेगा।"
नारायण गौड़ा ने कहा कि उनका संगठन पिछले 27 वर्षों से इस मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहा है और विरोध के बावजूद अभियान जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि 10-10 सदस्यों की 10 टीमें बनाई गई हैं, जो प्रतिदिन करीब 10 कंपनियों का दौरा कर जानकारी जुटा रही हैं।
अब तक जुटाए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि कई कंपनियों में कन्नड़िगा कर्मचारियों की हिस्सेदारी केवल 7 से 8 प्रतिशत या 20 से 25 प्रतिशत तक है, जबकि सिर्फ तीन या चार कंपनियों में यह संख्या लगभग 40 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, "इस आंदोलन को रोकने का कोई सवाल ही नहीं है। मैं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से अपील करता हूं कि वे आईटी कंपनियों के दबाव में न आएं। यह कन्नड़ युवाओं की आजीविका का सवाल है।"
इस अभियान को लेकर कर्नाटक में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समर्थकों का कहना है कि राज्य के तेजी से बढ़ते आईटी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने कंपनियों से इस तरह जानकारी मांगने की प्रक्रिया पर चिंता भी जताई है।
दूसरी ओर, मोहनदास पई ने कर्नाटक के कारोबारी माहौल और बेंगलुरु की वैश्विक तकनीकी केंद्र की पहचान को बचाने की अपील की है। उन्होंने कन्नड़िगाओं के रोजगार को लेकर नफरत फैलाने वाली राजनीति का विरोध किया।
पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक में बेरोजगारी दर 2.3 प्रतिशत और युवाओं में बेरोजगारी 10.3 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि राज्य में 67,000 से अधिक आईटी कंपनियां, 23,000 स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और 27 लाख से अधिक तकनीकी पेशेवर हैं।
पई ने कहा कि कर्नाटक की प्रगति पिछले 35 वर्षों में विभिन्न सरकारों और उद्योग जगत के नेताओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों से निवेश और बेंगलुरु के भविष्य को नुकसान पहुंचाने के बजाय मिलकर गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने की अपील की।
--आईएएनएस
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