कर्नाटक : कैबिनेट विस्तार से कांग्रेस में फिर असंतोष, सीएम शिवकुमार की धैर्य रखने की अपील
बेंगलुरु, 3 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार ने सोमवार को नाराज कांग्रेस नेताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की। कैबिनेट विस्तार के बाद उन विधायकों के बीच विरोध-प्रदर्शन, इस्तीफे की धमकियां और व्यापक निराशा देखी गई, जिन्हें मंत्री पद नहीं मिल पाया।
बढ़ती नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि कई काबिल और सीनियर विधायकों को मंत्रालय में जगह नहीं मिल पाई और उन्होंने उनसे उम्मीद न छोड़ने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, "मैं अंतिम सूची वहां भेजने के बाद अब लोक भवन जा रहा हूं। कई काबिल और सीनियर नेता हैं। मैं इससे इनकार नहीं करता। हालांकि, पार्टी को कई बातों को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं।"
शिवकुमार ने कहा कि उन्हें भी अतीत में मंत्री पद के लिए नजरअंदाज किया गया था।
उन्होंने कहा, "मुझे 2004 में कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान भी मैं लंबे समय तक कैबिनेट से बाहर रहा। मैंने धैर्य बनाए रखा, और उसी धैर्य की वजह से आज मैं इस पद पर हूं।"
निराश विधायकों से संयम बरतने की अपील करते हुए शिवकुमार ने कहा कि पार्टी समय आने पर सभी के लिए मौके बनाएगी। मैं सभी से धैर्य रखने का अनुरोध करता हूं। हम किसी न किसी तरह सभी के लिए मौके बनाएंगे। मैं अपने सभी नेताओं से ईमानदारी से धैर्य रखने की अपील करता हूं।
मुख्यमंत्री की अपील के बावजूद, राज्य के कई हिस्सों से नाराजगी की खबरें आती रहीं।
छह बार के विधायक तनवीर सैत, जिन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली, ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले समर्थन से वे बहुत भावुक हो गए।
सैत ने कहा, "जब से मुझ पर हमला हुआ है, पार्टी कार्यकर्ता मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे हैं। वे मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वे मेरी ताकत हैं। मैं अपने समर्थकों से सलाह करने के बाद फैसला लूंगा।"
पांच बार के विधायक हम्पनागौड़ा बदारली ने कैबिनेट विस्तार में रायचूर जिले को प्रतिनिधित्व न मिलने पर निराशा जताई और कहा कि इस क्षेत्र के सीनियर नेताओं के बावजूद जिले को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया।
बेंगलुरु में, गोविंदराजनगर के विधायक प्रिया कृष्णा को कैबिनेट में जगह न मिलने के बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रिया कृष्णा और उनके पिता, सीनियर कांग्रेस विधायक एम. कृष्णप्पा, दोनों मंत्री पद की दौड़ में थे और उम्मीद थी कि उनमें से कम से कम एक को जगह मिलेगी। हालांकि, दोनों में से किसी को भी कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं मिली।
कैबिनेट विस्तार से कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों के विधायकों में भी नाराजगी है, जो मंत्रालय में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की कमी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को बैठक करने वाले हैं। इसी तरह, गडग और विजयनगर जिलों के कांग्रेस विधायकों ने भी कैबिनेट गठन पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि बार-बार प्रतिनिधित्व की मांग के बावजूद जिले को नजरअंदाज किया गया।
कई महीनों की अटकलों और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक सस्पेंस को खत्म करते हुए, कांग्रेस सरकार ने सोमवार को आखिरकार कर्नाटक कैबिनेट का विस्तार करने का फैसला किया। पार्टी आलाकमान ने 20 विधायकों को मंत्री के तौर पर शामिल करने की मंजूरी दे दी।
--आईएएनएस
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