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देश के विकास में ईसाई शैक्षणिक संस्थानों का बड़ा योगदान: डी.के. शिवकुमार

बेंगलुरु, 27 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि ईसाई शैक्षणिक संस्थानों ने देश और राज्य में शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कई नेताओं को तैयार किया है। उन्होंने शुक्रवार को ज्योति निवास एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन की ओर से आयोजित कॉलेज डे सेलिब्रेशन में यह बात कही।
 
देश के विकास में ईसाई शैक्षणिक संस्थानों का बड़ा योगदान: डी.के. शिवकुमार

बेंगलुरु, 27 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि ईसाई शैक्षणिक संस्थानों ने देश और राज्य में शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कई नेताओं को तैयार किया है। उन्होंने शुक्रवार को ज्योति निवास एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन की ओर से आयोजित कॉलेज डे सेलिब्रेशन में यह बात कही।

उन्होंने ज्योति निवास कॉलेज को बेंगलुरु का गौरव बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने छह दशकों में कई प्रतिभाशाली और अनुशासित व्यक्तित्व तैयार किए हैं।

डी.के. शिवकुमार ने कहा, “ज्योति निवास ने पिछले 60 वर्षों में उत्कृष्ट सेवा दी है। मैंने इसके कई छात्रों को दुनिया के अलग-अलग देशों में देखा है। इस संस्थान ने ऐसे प्रतिभाशाली लोगों को तैयार किया है, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर नाम कमाया है।”

प्रतिभा के साथ संचार कौशल की अहमियत पर जोर देते हुए शिवकुमार ने कहा, “मैं भले ही एक राजनेता हूं, लेकिन शिक्षा का प्रेमी हूं। अंततः शिक्षा ही हमें आगे बढ़ाती है। उदाहरण देना आसान है, लेकिन खुद उदाहरण बनना मुश्किल होता है।”

अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे कनकपुरा के एक छोटे से गांव से आते हैं। उन्होंने सेंट थॉमस स्कूल में पढ़ाई की और बाद में एनपीएस में दाखिला लिया, जहां से उन्हें निकाल दिया गया। चुनाव लड़ने के कारण वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके और कम उम्र में विधायक बन गए। बाद में विधानसभा में वरिष्ठ नेताओं को सुनकर प्रेरित हुए और 46 साल की उम्र में अपनी डिग्री पूरी की।

उन्होंने कहा कि राजनीति में 33 प्रतिशत और स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के चलते अधिक महिला नेताओं के उभरने की जरूरत है और उम्मीद जताई कि यह कॉलेज भविष्य की महिला नेता तैयार करेगा।

उन्होंने कहा, “अगर हम अपनी जड़ों को भूल जाएंगे तो सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे। हमारी नींव मजबूत होनी चाहिए। मैं उपमुख्यमंत्री हूं, फिर भी अपने शिक्षकों के सामने झुकता हूं। हमें एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।”

ज्ञान साझा करने के महत्व पर उन्होंने कहा कि “ज्ञान और संपत्ति दोनों को साझा करना चाहिए। हर शिक्षक भी एक छात्र होता है। अगर शिक्षक सीखना बंद कर देंगे तो वे सिखा नहीं पाएंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज के एआई युग में सब कुछ तेजी से बदल रहा है। उनकी बेटी ने उन्हें चैट जीपीटी के जरिए तुरंत जानकारी हासिल करने का तरीका बताया। आज की पीढ़ी तकनीक में आगे है।

उन्होंने कहा कि आज के छात्र कई बार अपने शिक्षकों से पहले ही जानकारी हासिल कर लेते हैं। बेंगलुरु का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह शहर अपनी जलवायु, संस्कृति और प्रतिभा के कारण दुनिया भर में जाना जाता है।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक में हर साल लगभग 1.6 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तैयार होते हैं और यहां 270 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज, 1,160 आईटीआई और 72 मेडिकल कॉलेज हैं, जहां से हर साल 13,000 से अधिक डॉक्टर निकलते हैं। राज्य में करीब 26 लाख आईटी प्रोफेशनल और लगभग 2 लाख विदेशी नागरिक काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह सब ज्योति निवास, सेंट जोसेफ्स और माउंट कार्मेल जैसे संस्थानों की वजह से संभव हुआ है।

एक व्यक्तिगत किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे अपने बच्चों का जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन अपना जन्मदिन मनाने में झिझकते हैं। पेरिस की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां लोगों ने उन्हें केक काटने के लिए बुलाया, लेकिन एक व्यक्ति ने कहा कि भारत की संस्कृति दीप जलाने की है, बुझाने की नहीं।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी