राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में मकाऊ के पूर्व लोकतंत्र समर्थक सांसद 'आउ काम सैन' को 12.5 साल की जेल
मकाऊ, 7 नवंबर (आईएएनएस)। मकाऊ की एक अदालत ने पूर्व लोकतंत्र समर्थक सांसद 'आउ काम सैन' को 12.5 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने 'आउ काम सैन' को राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कामों के लिए मकाऊ के बाहर मौजूद संगठनों, समूहों और लोगों से संपर्क रखने का दोषी पाया।
'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सजा बंद कमरे में चली सुनवाई के बाद दी गई है, जो इस मकाऊ का पहला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि आउ ने लंबे समय तक विदेश स्थित 'विरोधी संगठनों' को विभिन्न तस्वीरें और जानकारियां जुटाने, तैयार करने और सार्वजनिक रूप से फैलाने में मदद की। अदालत के अनुसार, इन सामग्रियों में राज्य की राजनीतिक सत्ता के खिलाफ संदेश शामिल थे।
साल 2025 में उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सार्वजनिक रूप से सामने आया पहला अभियोजन मामला था। यह कानून 2009 में लागू किया गया था। आउ के परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें परिवार से संपर्क करने और अपनी पसंद के निजी वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
उनका मुकदमा सितंबर में बंद कमरे में चला और केवल तीन दिनों में समाप्त हो गया। परिवार की मदद कर रहे संगठन 'जस्टिस एब्रॉड' के निदेशक माइकल पोलाक ने इस सुनवाई को 'दिखावटी मुकदमा' बताया और कहा कि इससे मकाऊ की छवि को नुकसान पहुंचा है।
69 वर्षीय आउ काम सान के पास पुर्तगाल और मकाऊ, दोनों की नागरिकता है। उन्हें मकाऊ के सबसे प्रमुख विपक्षी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक ऐसी विधानसभा में सांसद के रूप में काम किया, जहां अधिकांश सदस्य बीजिंग समर्थक माने जाते हैं।
माइकल पोलाक ने 'द इंडिपेंडेंट' को बताया कि आउ के खिलाफ मुकदमा और उन पर लगाए गए कथित आरोपों ने मकाऊ को उन देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जहां सरकार अपने विरोधियों को जेल भेज सकती है और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की पर्याप्त गारंटी नहीं होती।
पेशे से शिक्षक रहे आउ बाद में राजनीति में आए और 2021 में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। वह 1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में हुए सैन्य दमन की याद में आयोजित कार्यक्रमों के प्रमुख आयोजकों में भी शामिल रहे थे। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि आउ के खिलाफ की गई कार्रवाई मकाऊ में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय रखने वाले लोगों के लिए डर पैदा करने वाला संदेश है।
संगठन की उप-एशिया निदेशक माया वांग ने कहा कि लोकतंत्र समर्थक आवाजों को दबाने की यह कोशिश चीन सरकार द्वारा असहमति और बुनियादी आजादी पर किए जा रहे व्यापक दबाव का हिस्सा दिखती है।
आलोचकों का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा असहमति के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अब मकाऊ तक पहुंच चुका है। 1999 में चीन को सौंपे जाने के बाद से मकाऊ, हांगकांग की तरह एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में काम करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने पहले कहा था कि खुली सुनवाई नहीं कराने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों पर कोई असर न पड़े। यह मामला मकाऊ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के इस्तेमाल को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।
--आईएएनएस
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