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दक्षिण चीन सागर में बीजिंग का ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल जोन’ गंभीर चिंता का विषय: रिपोर्ट

नैप्यीडॉ, 10 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा एक कथित “इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल ज़ोन” की स्थापना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की बढ़ती महत्वाकांक्षा और आक्रामकता को रेखांकित करती है। यह कदम इस धारणा को दर्शाता है कि सैन्य प्रभुत्व के ज़रिये राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। यह बात शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कही गई।
 
दक्षिण चीन सागर में बीजिंग का ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल जोन’ गंभीर चिंता का विषय: रिपोर्ट

नैप्यीडॉ, 10 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा एक कथित “इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल ज़ोन” की स्थापना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की बढ़ती महत्वाकांक्षा और आक्रामकता को रेखांकित करती है। यह कदम इस धारणा को दर्शाता है कि सैन्य प्रभुत्व के ज़रिये राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। यह बात शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कही गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में हस्तक्षेप कर सीसीपी ने युद्ध के क्षेत्र में अपने सत्तावादी दृष्टिकोण को लागू किया है, जो अमेरिका की सैन्य शक्ति के प्रक्षेपण को चुनौती देता है और इंडो-पैसिफिक में तनाव को बढ़ाता है।

म्यांमार के मीडिया आउटलेट ‘मिज़्ज़िमा न्यूज़’ में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया, “दक्षिण चीन सागर को एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्धक्षेत्र में बदलना इंडो-पैसिफिक पर प्रभुत्व स्थापित करने की चीन की दीर्घकालिक रणनीति का सबसे आक्रामक और चिंताजनक कदम है। जो प्रक्रिया कृत्रिम द्वीपों के निर्माण से शुरू हुई थी, वह अब एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हब में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य केवल निगरानी नहीं बल्कि अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ताकत को निष्क्रिय करना है।”

रिपोर्ट में बताया गया कि उपग्रह चित्रों और स्वतंत्र आकलनों से पुष्टि होती है कि चीन ने फिएरी क्रॉस, मिसचीफ और सुबी रीफ्स पर अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ढांचे का विस्तार किया है। इनमें मोनोपोल एंटेना, मोबाइल जैमिंग वाहन, रैडोम और मजबूत सैन्य ठिकाने शामिल हैं, जिनका उद्देश्य पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर नियंत्रण दिलाना है। इन क्षमताओं के ज़रिये चीन संचार को बाधित कर सकता है, रडार को जाम कर सकता है और विदेशी सैन्य बलों की लोकेशन का पता लगा सकता है, जिससे विरोधी ताकतें ‘अंधी’ हो सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच इन प्रणालियों में सीसीपी का भारी निवेश अमेरिका की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं को कमजोर करने की एक सुनियोजित रणनीति को दर्शाता है और अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की प्रभावशीलता को चुनौती देता है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह केवल सैन्य उपकरणों का मामला नहीं है, बल्कि शक्ति प्रक्षेपण को लेकर सीसीपी की व्यापक सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “पार्टी लंबे समय से यह समझती है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र में प्रभुत्व समुद्र पर नियंत्रण जितना ही निर्णायक है। कृत्रिम द्वीपों, मोबाइल जैमर्स और जहाज़-आधारित ‘किल वेब्स’ को जोड़कर चीन ने ऐसी परतदार रक्षा प्रणाली तैयार की है, जो अमेरिकी निगरानी और लक्ष्य निर्धारण प्रणालियों को पंगु बना सकती है।”

--आईएएनएस

डीएससी