'चीनी एआई से अमेरिकी इनोवेशन को खतरा', सीनेटर ने पेटेंट नियमों को सख्त करने की उठाई मांग
वाशिंगटन, 8 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर जिम बैंक्स ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग से पेटेंट सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग की है। उनका आरोप है कि चीनी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर अमेरिकी पेटेंट आवेदनों का विश्लेषण कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी नवाचार, दवा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है तथा अमेरिका की चीन के बायोटेक उद्योग पर निर्भरता बढ़ सकती है।
इंडियाना से सीनेटर जिम बैंक्स ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक को लिखे पत्र में अमेरिकी पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय से अमेरिकी आविष्कारों को, उनके शब्दों में, "एआई-इनेबल्ड डुप्लीकेशन" से बचाने के लिए शुरू किए गए सुधारों को जारी रखने का आग्रह किया है।
पत्र में दावा किया गया है कि चीनी कंपनियां एआई की मदद से अमेरिकी जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े पेटेंट आवेदनों का विश्लेषण कर रही हैं, व्यावसायिक रूप से लाभदायक खोजों की पहचान कर रही हैं और अमेरिकी कंपनियों के बाजार में उत्पाद उतारने से पहले उनसे मिलते-जुलते पेटेंट दाखिल कर रही हैं।
बैंक्स ने पत्र में लिखा, "पेटेंट स्क्रैपिंग चीन से जुड़े बौद्धिक संपदा (आईपी) खतरे को बढ़ा रही है और विशेष रूप से चीन की तेज दवा अनुमोदन प्रक्रिया को देखते हुए अमेरिकी अनुसंधान एवं विकास निवेश को कमजोर करने का जोखिम पैदा कर रही है। यदि प्रतिस्पर्धी किसी आविष्कार में मामूली बदलाव कर नियामकीय मंजूरी पहले हासिल कर लेते हैं, तो अनुसंधान एवं विकास में निवेश का प्रोत्साहन कमजोर पड़ जाता है।"
उन्होंने कहा कि यह चुनौती केवल बौद्धिक संपदा की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि और इसका असर फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन पर भी पड़ता है।
पत्र में बैंक्स ने कहा कि 1980 के दशक से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने जैव प्रौद्योगिकी को रणनीतिक प्राथमिकता बनाया है। इसके तहत अनुसंधान अवसंरचना में भारी निवेश किया गया है और उत्पाद विकास को तेज करने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि कम लागत के कारण कई अमेरिकी कंपनियों ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स और जेनेरिक दवाओं का उत्पादन चीन में स्थानांतरित कर दिया, जिससे अमेरिका की चीन के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग पर निर्भरता बढ़ती गई।
2024 के बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन के सर्वे का हवाला देते हुए, बैंक्स ने कहा कि 79 प्रतिशत अमेरिकी बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों ने चीन-स्थित या चीन के स्वामित्व वाली मैन्युफैक्चरर के साथ कम से कम एक कॉन्ट्रैक्ट या प्रोडक्ट एग्रीमेंट की बात कही है। सीनेटर के अनुसार, ऐसी निर्भरता "न केवल हमारी घरेलू सप्लाई चेन में कमजोरियां पैदा करती है, बल्कि अमेरिका के बायोटेक सेक्टर को ऐसे देश के सामने और अधिक जोखिम में डालती है जो सक्रिय रूप से हमारे उद्योगों को कमजोर करने और उनका फायदा उठाने की कोशिश करता है।"
बैंक्स ने यह भी आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां पारंपरिक पेटेंट विश्लेषण के साथ एआई उपकरणों का उपयोग कर तेजी से पेटेंट आवेदनों और शोध संबंधी जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं।
उनका कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धी मूल अनुसंधान एवं विकास की लागत उठाए बिना अमेरिकी नवाचारों का लाभ उठा सकते हैं और बेहद तेज गति से उनसे मिलते-जुलते पेटेंट आवेदन दाखिल कर सकते हैं।
सीनेटर ने यह भी कहा कि एआई से तैयार किए गए बड़ी संख्या में पेटेंट आवेदन पेटेंट कार्यालयों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा, "कम गुणवत्ता वाले एआई-जनित आवेदन पेटेंट प्रणाली पर बोझ बढ़ा सकते हैं। मशीन के ज़रिए बड़े पैमाने पर किए गए ऐसे आवेदन, जिनमें इंसानों का कोई खास योगदान नहीं होता, यूएसपीटीओ पर और दबाव डाल सकते हैं। इससे जांच का काम पेंडिंग हो सकता है और 'प्रायर-आर्ट' (पहले से मौजूद तकनीक) के एनालिसिस में मुश्किल आ सकती है।"
बैंकों ने लटनिक और यूएसपीटीओ के अंडर सेक्रेटरी स्क्वायर्स से आग्रह किया कि वे उन इनोवेशन को बचाने के लिए सुधारों को प्राथमिकता देना जारी रखें, जिनकी एआई की मदद से नकल किए जाने का खतरा है।
उन्होंने लिखा, "मैं पेटेंट स्क्रैपिंग की समस्या पर यूएसपीटीओ द्वारा दिए जा रहे ध्यान और अब तक की गई पहल की सराहना करता हूं। मैं आप और अंडर सेक्रेटरी स्क्वायर्स से आग्रह करता हूं कि सुधारों को प्राथमिकता देना जारी रखें और एआई-सक्षम नकल के जोखिम वाले नवाचारों की रक्षा करें।"
अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बन गई है। विशेष रूप से जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में यह विवाद अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। वाशिंगटन लंबे समय से बीजिंग पर सरकारी समर्थन वाली औद्योगिक नीतियों और साइबर माध्यमों के जरिए विदेशी प्रौद्योगिकी हासिल करने के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन इन आरोपों से लगातार इनकार करता आया है।
--आईएएनएस
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