चीन पर जातीय एकता कानून का विरोध करने वाले तिब्बतियों को परेशान करने का आरोप
वेलिंगटन, 16 अगस्त (आईएएनएस)। चीन के जातीय एकता और प्रगति कानून का विरोध करने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों की कथित तौर पर निगरानी और उन्हें परेशान किया जा रहा है। न्यूजीलैंड में रहने वाले एक तिब्बती व्यक्ति ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में यह दावा किया है।
रेडियो न्यूजीलैंड (आरएनजेड) के मुताबिक, न्यूजीलैंड में रहने वाले गाडेन नाम के एक तिब्बती व्यक्ति ने बताया कि उन्हें ऐसे मामलों की जानकारी है, जहां लोगों पर चीनी नागरिकों की ओर से दबाव बनाया गया।
गाडेन ने कहा, “वे सीधे हमारे पास नहीं आते... वे बस दूर से हमारी तस्वीर लेते हैं।”
आरएनजेड की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड की सुरक्षा खुफिया सेवा (एसआईएस) ने अपने नवीनतम खतरा आकलन में कहा है कि देश में रहने वाले प्रवासी समुदायों को विदेशी राज्यों और उनके प्रतिनिधियों की ओर से अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रता को सीमित करना है।
गाडेन ने चीन के जातीय एकता कानून को तिब्बती संस्कृति को खत्म करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत में तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति नहीं है। हालांकि, मठों, लोगों के घरों और अन्य स्थानों के बाहर प्रार्थना के झंडे लगाए जाते थे।
उन्होंने दावा किया कि अब इन प्रार्थना झंडों को भी हटाया जा रहा है और कुछ मामलों में उन्हें जलाया तथा पैरों से रौंदा जा रहा है।
गाडेन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हाल में एक व्यक्ति द्वारा खुद को आग लगाने और बाद में उसकी मौत की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ तिब्बती जातीय एकता कानून के विरोध में आत्मदाह जैसे कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “उसने तिब्बतियों के न्यायपूर्ण उद्देश्य के लिए खुद को जला लिया, क्योंकि हम सभी बेहद निराश हैं।”
गाडेन ने कहा कि तिब्बती लोग शांतिपूर्ण हैं और चीन के भीतर किसी तरह का नुकसान पहुंचाना या हिंसा नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल अपनी पहचान और संस्कृति को संरक्षित रखने की है।
इस बीच, ‘द यूरोपियन टाइम्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तिब्बत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियां समावेशन के जरिए साम्राज्य विस्तार का उदाहरण पेश करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कठोर और जबरन समावेशन की योजनाओं को अंततः व्यवस्था संबंधी सीमाओं का सामना करना पड़ता है।
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के भतीजे खेद्रूब थोंडुप ने ‘द यूरोपियन टाइम्स’ में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा कि इतिहास बताता है कि कोई भी साम्राज्य हमेशा कायम नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि आज चीनी कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बती पठार पर आधुनिकरण, निगरानी और जनसांख्यिकीय बदलावों के जरिए अपना नियंत्रण मजबूत कर रही है।
--आईएएनएस
डीएससी
