शोपियां में बाल आत्महत्या के मामलों में फोटो-सीसीटीवी शेयर करने पर रोक, बाल संरक्षण प्राधिकरण का आदेश
श्रीनगर, 31 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के शोपियां स्थित जिला बाल संरक्षण प्राधिकरण (सीपीए) ने बाल आत्महत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में फोटो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य पहचान संबंधी जानकारी के प्रसार पर प्रतिबंध लगा दिया है।
मिशन वात्सल्य के तहत जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) द्वारा जारी यह निर्देश, जिला बाल संरक्षण इकाई के संज्ञान में आए एक हालिया बाल आत्महत्या के प्रयास के मामले के बाद आया है।
अधिकारियों, संस्थानों, मीडिया संगठनों और आम जनता को निर्देश दिया गया है कि वे आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास की घटनाओं में शामिल बच्चों की पहचान उजागर करने वाली किसी भी प्रकार की फोटो, वीडियो, स्क्रीनशॉट या सामग्री को अपलोड, प्रकाशित या सार्वजनिक न करें।
आदेश में विशेष रूप से बच्चे का नाम, पता, स्कूल, माता-पिता का विवरण, संपर्क जानकारी और स्थान जैसी जानकारियों के खुलासे पर रोक लगाई गई है।
इसके अलावा, यह व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या सार्वजनिक संचार चैनलों पर केस रिकॉर्ड, जांच दस्तावेज, चिकित्सा जानकारी, बयान और अन्य गोपनीय सामग्री साझा करने पर भी रोक लगाता है।
डीसीपीओ ने अलग से निर्देश दिया है कि ऐसी घटनाओं से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को गोपनीय रखा जाए। जांच या न्यायिक कार्यवाही के लिए आवश्यक होने पर, फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और केवल सक्षम जांच प्राधिकारी, न्यायालय या अन्य कानूनी रूप से अधिकृत निकाय को ही उपलब्ध कराया जाए।
आदेश में किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 का उल्लेख किया गया है, जो कानून से संघर्ष कर रहे बच्चों, देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों और पूछताछ, जांच या न्यायिक कार्यवाही में बाल पीड़ितों या गवाहों की पहचान की सुरक्षा करती है।
इस प्रावधान का उल्लंघन धारा 74(3) के तहत दंडनीय है, जिसमें छह महीने तक की कैद या 2 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
जिला बाल संरक्षण कार्यालय ने मीडियाकर्मियों, समाचार एजेंसियों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों से बाल आत्महत्या के प्रयासों पर रिपोर्टिंग करते समय लागू कानून और भारतीय प्रेस परिषद के मानदंडों का पालन करने को भी कहा है। इसने सनसनीखेज रिपोर्टिंग, फोटो या वीडियो के प्रकाशन, अनावश्यक विवरणों के खुलासे और बार-बार या प्रमुखता से कवरेज के खिलाफ चेतावनी दी है।
साथ ही, आदेश यह भी साफ करता है कि कानून के तहत सुरक्षित कानूनी रिपोर्टिंग या जांच पर कोई रोक नहीं है। फिर भी, यह दोहराया गया है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) के नियमों के खिलाफ जाकर किसी बच्चे की पहचान या पहचान से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए।
देश भर में बाल संरक्षण अधिकारियों ने बच्चों की पहचान सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया है, जिसके तहत उनका नाम, माता-पिता का विवरण, और स्कूल या घर का पता गुप्त रखा जाना चाहिए; और हाल ही में इन नियमों को सख्ती से लागू किया गया है।
--आईएएनएस
एमएस/
