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पीएम के 'मन की बात' में जिक्र के बाद चिकमगलूर में तेजी से बढ़ रही एवोकाडो की खेती

बेंगलुरु, 31 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक का खूबसूरत हिल स्टेशन चिकमगलूर मुख्य रूप से दो वजहों से चर्चा में है: एक तो इसकी खूबसूरत जगहें और शानदार नजारे, और दूसरी वजह है रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यहां की खास कॉफी और काली मिर्च की खेती की तारीफ करना।
 

बेंगलुरु, 31 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक का खूबसूरत हिल स्टेशन चिकमगलूर मुख्य रूप से दो वजहों से चर्चा में है: एक तो इसकी खूबसूरत जगहें और शानदार नजारे, और दूसरी वजह है रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यहां की खास कॉफी और काली मिर्च की खेती की तारीफ करना।

कॉफी का जन्मस्थान के नाम से पहचाना जाने वाला यह पहाड़ी इलाका किसानों को कमाई का एक और जरिया दे रहा है। वे कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो की खेती (इंटरक्रॉपिंग) कर रहे हैं और इससे अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं।

कॉफी के बागानों के साथ एवोकाडो की खेती का यह तरीका पिछले कुछ महीनों में यहां तेजी से बढ़ा है। पीएम मोदी द्वारा इस मिले-जुले खेती के तरीके की तारीफ करने के बाद, इसमें लोगों की दिलचस्पी और इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

कर्नाटक के चिकमगलूर के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने खास तौर पर तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का जिक्र किया, जिन्होंने आधी हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की और उनकी आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।

पीएम मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में कहा कि कर्नाटक के चिकमगलूर में कुछ किसान भाई-बहनों ने अपने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे भी लगाए हैं। इससे उन्हें कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।

उन्होंने आगे कहा कि हम अक्सर शहरों के रेस्टोरेंट में एवोकाडो टोस्ट के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसी एवोकाडो के जरिए हमारे नए-नए तरीके आजमाने वाले किसानों ने कमाई का एक नया जरिया खोज निकाला है।

पारंपरिक रूप से, चिक्कमगलुरु में कॉफी, काली मिर्च और मसालों की खेती मुख्य रही है। लेकिन हाल ही में, एवोकाडो की खेती को इंटरक्रॉप (मुख्य फसल के साथ उगाई जाने वाली फसल) के तौर पर काफी पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इससे अतिरिक्त कमाई होती है।

हाल के वर्षों में, किसानों की एवोकाडो की खेती में दिलचस्पी काफी बढ़ी है। चिक्कमगलुरु, कलासा, बालेहोनूरु, मुडिगेरे, जयापुरा, एनआर पुरा, कोप्पा और कदूर जैसी कई जगहों पर एवोकाडो उगाने वाले किसानों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए कुछ किसानों ने बताया कि होटलों और रेस्तरां में, खासकर शहरी इलाकों में, एवोकाडो से बने खाने-पीने के सामान की मांग बढ़ी है, इसलिए वे अपनी खेती में इसे नियमित रूप से अपना रहे हैं।

एक और किसान ने कहा कि कॉफी और काली मिर्च की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कभी-कभी उनकी कमाई पर पड़ता है। फिर भी, एवोकाडो की खेती से कमाई का एक स्थिर जरिया मिला है, और इसलिए ज्यादा से ज्यादा किसान इसे अपना रहे हैं।

एक अन्य किसान ने कहा कि कॉफी के साथ-साथ एवोकाडो की खेती ने उन्हें 'एक बागान, कमाई के कई जरिया' वाला खेती का एक नया मॉडल दिया है, और इससे उन्हें अलग जमीन की जरूरत के बिना ही ऐसा करने का मौका मिला है।

--आईएएनएस

एमएस/