Aapka Rajasthan

छत्तीसगढ़ : दुर्ग में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध हालत में मौत, पति-पत्नी फंदे से लटके मिले

रायपुर/दुर्ग, 22 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मोहन नगर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आर्य नगर स्थित एक निजी आवास में, एक ही परिवार के चार सदस्य संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए।
 
छत्तीसगढ़ : दुर्ग में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध हालत में मौत, पति-पत्नी फंदे से लटके मिले

रायपुर/दुर्ग, 22 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मोहन नगर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आर्य नगर स्थित एक निजी आवास में, एक ही परिवार के चार सदस्य संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए।

घर के एक कमरे से मृतकों के शव मिले, जिससे आस-पड़ोस में सनसनी फैल गई और मौत के कारणों को लेकर गंभीर सवाल पैदा हो गए। लोग इस बात पर यकीन नहीं कर रहे हैं और दुख जता रहे हैं कि एक पूरे परिवार को खो दिया।

मरने वालों की पहचान 45 साल के गोविंद साहू, उनकी पत्नी चंचल साहू, उनके 10 साल के बेटे यशंत साहू और उनकी 13 साल की बेटी दृश्या साहू के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, पति-पत्नी के शव फंदे से लटकी हुई मिले, जबकि बच्चों के शव बिस्तर पर लेटी हुई अवस्था में थे। मौके से एक सुसाइड नोट मिलने से जांच में एक और परत जुड़ गई है, हालांकि पुलिस ने कहा है कि नोट की सच्चाई और अहमियत का पता लगाने के लिए उसकी अच्छी तरह से जांच की जा रही है।

मौत की सही वजह का पता लगाने और घटनाओं के क्रम को साफ करने के लिए फोरेंसिक सबूत इकट्ठा करने के लिए चारों लाशों का पोस्टमॉर्टम किया गया है। जांचकर्ताओं ने इशारा किया है कि पहली नजर में सबूत बताते हैं कि बच्चों को उनकी मौत से पहले शायद बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया था, हालांकि बड़ी जांच के हिस्से के तौर पर इस पहलू की अभी भी जांच हो रही है।

पुलिस ने इस स्टेज पर किसी भी पॉसिबिलिटी से इनकार नहीं किया है। पड़ोसियों, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से पूछताछ कर रही है, ताकि परिवार के बैकग्राउंड और किसी भी पॉसिबल मोटिव या स्ट्रेस का पता लगाया जा सके जिसके परिणाम के तौर पर इतनी भयावह घटना हुई है।

छत्तीसगढ़ में हाल के सालों में परिवार से जुड़ी कई दुखद घटनाएं हुई हैं, जो अक्सर पैसे की दिक्कतों, मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम या इलाके में बड़ी आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों से बढ़े घरेलू दबावों से जुड़ी होती हैं। मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि कैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी या क्राइसिस का इलाज न होने पर परिवारों में बहुत बड़े फैसले लिए जा सकते हैं, खासकर जब कमजोर बच्चे शामिल हों।

इस मामले में, पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या परिवार को कर्ज, हेल्थ प्रॉब्लम या आपसी झगड़े जैसी कोई अनजान मुश्किल का सामना करना पड़ा था, जिसकी इसमें भूमिका हो सकती है। पोस्ट-मॉर्टम के बाद शवों को परिवार के करीबी रिश्तेदारों को सौंप दिया गया, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह काम किया गया।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, पुलिस सूत्रों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में फोरेंसिक एनालिसिस और परिवार के करीबी लोगों से लिए गए बयानों के आधार पर और जानकारी सामने आ सकती है।

--आईएएनएस

एससीएच/एएस