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मध्य प्रदेश : कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता आशा के 8 माह के शावक की मौत

भोपाल/श्योपुर, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की सोमवार को मौत हो गई। सुबह की निगरानी के दौरान शावक लापता पाया गया था, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई।
 

भोपाल/श्योपुर, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की सोमवार को मौत हो गई। सुबह की निगरानी के दौरान शावक लापता पाया गया था, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई।

इस घटना के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या घटकर 59 रह गई है, जिनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं।

वन विभाग के कर्मचारियों ने नियमित निगरानी के दौरान देखा कि आशा अपने पांच शावकों में से केवल चार के साथ थी। इसके बाद लापता शावक की तलाश शुरू की गई।

प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर ने बताया, "सुबह की निगरानी के दौरान आशा अपने पांच में से चार शावकों के साथ दिखाई दी। लापता शावक की तलाश की गई और बाद में वह मृत पाया गया।"

अधिकारी ने कहा कि शावक की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

इस मौत के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या घटकर 53 रह गई है, जिनमें 40 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।

इनमें से 15 चीते फिलहाल खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि अन्य बाड़ों में रखे गए हैं या निगरानी में हैं।

करीब आठ महीने पहले आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था। यह जन्म प्रोजेक्ट चीता के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत में चीतों की एक आत्मनिर्भर आबादी विकसित करना है। भारत में चीतों को वर्ष 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।

ताजा घटना ने एक बार फिर चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम की चुनौतियों को उजागर किया है। प्रोजेक्ट के तहत भारत में कई शावकों का जन्म हुआ है, लेकिन इसके साथ ही कुछ वयस्क चीतों और शावकों की मौत भी हो चुकी है।

भारत ने सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाकर प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की थी। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए थे, ताकि इस प्रजाति को उसके ऐतिहासिक आवास क्षेत्र में फिर से बसाया जा सके।

इस प्रोजेक्ट में अफ्रीकी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल है। साथ ही चीतों के संरक्षण और प्रजनन के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार, पशु चिकित्सा देखभाल और वैज्ञानिक निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कूनो के अलावा वर्तमान में चार चीते गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य और दो चीते वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी रखे गए हैं। इस तरह मध्य प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 59 है, जिनमें से 41 का जन्म भारत में हुआ है।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम