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छत्तीसगढ़: अश्लील डांस परफॉर्मेंस रोकने में नाकाम रहने पर एसडीएम निलंबित

रायपुर, 16 जनवरी (आईएएनएस)। रायपुर संभागीय आयुक्त महादेव कावरे ने गरियाबंद जिले के मैनपुर उपमंडल के उप कलेक्टर (एसडीएम) तुलसीदास मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
 
छत्तीसगढ़: अश्लील डांस परफॉर्मेंस रोकने में नाकाम रहने पर एसडीएम निलंबित

रायपुर, 16 जनवरी (आईएएनएस)। रायपुर संभागीय आयुक्त महादेव कावरे ने गरियाबंद जिले के मैनपुर उपमंडल के उप कलेक्टर (एसडीएम) तुलसीदास मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई एक जांच के बाद की गई है, जिसमें पुष्टि हुई है कि मरकाम ने अश्लील नृत्यों वाले एक नृत्य कार्यक्रम के लिए अनियमित अनुमति दी थी और कार्यक्रम के दौरान मौजूद होने के बावजूद हस्तक्षेप करने में विफल रहे। स्थानीय युवा समिति द्वारा आयोजित यह छह दिवसीय कार्यक्रम 5 से 10 जनवरी, 2026 तक देवभोग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के उर्मल गांव, आमलीपादर तहसील, मैनपुर विकास खंड में हुआ था।

एसडीएम मरकाम ने 29 दिसंबर, 2025 को मनोरंजन के नाम पर अनुमति जारी की थी, लेकिन प्रदर्शन अश्लील और भद्दे कृत्यों में तब्दील हो गया, जिनमें अर्धनग्न नृत्य भी शामिल था।

9 जनवरी, 2026 की रात को मरकाम स्वयं उस स्थान पर उपस्थित थे, जहां कथित तौर पर वीडियो में उन्हें और पुलिसकर्मियों को कलाकारों पर पैसे लुटाते, उनकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करते और आपत्तिजनक सामग्री के बीच निष्क्रिय रहते हुए दिखाया गया था।

इस घटना ने व्यापक आक्रोश पैदा किया, जिसके बाद गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 11 या 12 जनवरी को मरकाम को उनके पद से हटा दिया, उन्हें जिला मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया, और अतिरिक्त कलेक्टर को जांच का आदेश दिया।

14 जनवरी, 2026 को प्रस्तुत अतिरिक्त कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि अनुमति नियमों का उल्लंघन था और अश्लील गतिविधियां बेरोकटोक जारी रहीं। इस रिपोर्ट और वायरल साक्ष्यों के आधार पर संभागीय आयुक्त ने संबंधित सेवा नियमों के तहत मामले को निलंबन तक बढ़ा दिया।

इस विवाद के कारण 14 आयोजकों की गिरफ्तारी, तीन पुलिसकर्मियों का निलंबन और ओडिशा स्थित एक डांसर के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई भी हुई।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के कृत्यों पर आधिकारिक चुप्पी साधना या उन्हें बढ़ावा देना कर्तव्य की अवहेलना है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ऐसे कार्यक्रम सार्वजनिक नैतिकता और सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

--आईएएनएस

एमएस/